आधुनिक रेडिएशन तकनीक से ओरल कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार
बड़ौत: ओरल कैविटी कैंसर भारत में सबसे आम कैंसरों में से एक है, जो मुख्य रूप से तंबाकू चबाने, धूम्रपान, शराब के सेवन और खराब ओरल हाइजीन से जुड़ा होता है। इस बीमारी से जूझ रहे कई मरीजों को केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि इलाज के दौरान होने वाले साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ता है, जो बोलने, निगलने, स्वाद महसूस करने और पोषण पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, आधुनिक रेडिएशन तकनीकों में हुई प्रगति ने ओरल कैंसर के इलाज के परिणामों के साथ-साथ मरीजों की जीवन गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार किया है।
ओरल कैंसर के चुनिंदा मरीजों में रेडिएशन थेरेपी का उपयोग सर्जरी के बाद या कीमोथेरेपी के साथ किया जाता है। पहले की रेडिएशन तकनीकों में स्वस्थ ऊतकों के बड़े हिस्से भी रेडिएशन की चपेट में आ जाते थे, जिससे मुंह का अत्यधिक सूखना, दर्दनाक छाले, निगलने में परेशानी, जबड़े में जकड़न और दांतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती थीं। आधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी ने अधिक सटीक इलाज के जरिए इन साइड इफेक्ट्स को काफी हद तक कम किया है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर,डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया “इस क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति आईएमआरटी (IMRT - Intensity Modulated Radiation Therapy) है। यह तकनीक ट्यूमर पर सटीक रूप से रेडिएशन पहुंचाती है और आसपास की स्वस्थ संरचनाओं जैसे लार ग्रंथियां, जबड़े की हड्डी, स्पाइनल कॉर्ड और निगलने वाली मांसपेशियों की सुरक्षा करती है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को मुंह सूखने की समस्या कम होती है, निगलने में कम दिक्कत आती है और बोलने तथा पोषण क्षमता बेहतर बनी रहती है।
पीईटी-सीटी (PET-CT) और एमआरआई फ्यूजन (MRI Fusion) जैसी एडवांस्ड इमेजिंग तकनीकें बीमारी के सटीक फैलाव को समझने में मदद करती हैं, जिससे रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट अधिक सुरक्षित और प्रभावी उपचार योजना तैयार कर सकते हैं। ये आधुनिक तकनीकें न केवल इलाज की सफलता दर बढ़ाती हैं, बल्कि मरीजों की रिकवरी को भी तेज करती हैं और उन्हें सामान्य जीवन में जल्दी लौटने में मदद करती हैं।
डॉ. राजेंद्र ने आगे बताया “रेडिएशन उपचार के दौरान सहायक देखभाल में भी काफी सुधार हुआ है। पोषण संबंधी सलाह, ओरल केयर, दर्द प्रबंधन, जबड़े की एक्सरसाइज और बोलने व निगलने की पुनर्वास थेरेपी मरीजों को उपचार के दौरान बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करती हैं। बुजुर्ग मरीजों या ऐसे लोगों के लिए जो बड़ी सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं हैं, आधुनिक रेडिएशन थेरेपी को कीमोथेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।
आधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी आज ओरल कैंसर के उपचार में एक बड़ी उपलब्धि बन चुकी है, जो मरीजों को अधिक सुरक्षित इलाज, कम साइड इफेक्ट्स और बेहतर दीर्घकालिक रिकवरी प्रदान कर रही है।