अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण: योगी शंभूनाथ महाराज
प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र से इस वक्त एक बड़ी और भक्तिमय खबर सामने आ रही है। कुंडा के कना
अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण: योगी शंभूनाथ महाराज
प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र से इस वक्त एक बड़ी और भक्तिमय खबर सामने आ रही है। कुंडा के कनावां गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। इस आध्यात्मिक समागम में गोरक्षपीठ गोरखपुर से पधारे कथावाचक योगी शंभूनाथ शास्त्री जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन का सबसे बड़ा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अहंकार ही मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण है।
दरअसल, प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील के कनावां गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। गोरक्षपीठ गोरखनाथ धाम से आए कथावाचक योगी शंभूनाथ शास्त्री जी महाराज ने भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंग का बेहद भावपूर्ण वर्णन किया।
महाराज जी ने व्यासपीठ से संदेश देते हुए कहा कि दान, धर्म और परोपकार तभी फलदायी होते हैं जब इंसान के अंदर अहंकार न हो। भगवान ने वामन रूप धारण कर राजा बलि के इसी अभिमान का हरण किया था।
अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण है, जबकि विनम्रता और सेवा भाव उसे ईश्वर की कृपा का पात्र बनाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत कर उसे सत्य के मार्ग पर ले जाती है।
इस कथा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के दिग्गज नेता और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा भैया के ज्येष्ठ पुत्र कुंवर शिवराज प्रताप सिंह यानी 'बड़े राजा' भी कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने व्यासपीठ के दर्शन कर महाराज जी से आशीर्वाद लिया, जिससे पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और दोगुना हो गया।
कथा के विश्राम के बाद मुख्य यजमान सुशीला देवी और सुंदरलाल विश्वकर्मा ने विधि-विधान से भगवान की महाआरती की और भक्तों में प्रसाद का वितरण किया।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में ममता विश्वकर्मा, संजीव, वीरेंद्र, सिद्धार्थ (वीरू), विनायक (छोटू), प्रधान शिवशरण विश्वकर्मा सहित पूरे विश्वकर्मा परिवार और स्थानीय ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग रहा। प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से पूरा कुंडा क्षेत्र इस समय भक्तिमय माहौल में सराबोर है।
कनावां गांव में हो रही इस भागवत कथा ने पूरे इलाके को अध्यात्म के रंग में रंग दिया है। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के धार्मिक आयोजन न सिर्फ सनातन संस्कृति को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देते हैं।
कुंडा से हमारे संवाददाता की रिपोर्ट। देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए बने रहिए