कुख्यात अपराधी सुनील राठी के नाम पर धमकी देने का आरोपित कोर्ट से दोषमुक्त, एडवोकेट लोकेश शर्मा की दलीलें रंग लाईं
विकासनगर (देहरादून):
न्यायिक मजिस्ट्रेट विकासनगर जतिन मित्तल की अदालत ने उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी सुनील राठी के नाम पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने इस मामले की गहन सुनवाई के बाद सबूतों के अभाव में मुख्य आरोपी सुशील उर्फ धनंजय को संदेह का लाभ देते हुए पूरी तरह से दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता लोकेश शर्मा एवं अधिवक्ता विकास चौधरी ने अदालत के समक्ष मजबूत कानूनी दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों, विशेषकर कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और गवाहों के बयानों में पर्याप्त विश्वसनीयता की कमी है। इसके अतिरिक्त, मामले से जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता और तकनीकी सत्यता को भी कोर्ट में कानूनी रूप से सिद्ध नहीं किया जा सका।
दरअसल, यह मामला 07 फरवरी 2016 को सेलाकुई निवासी रामअवतार को उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को कुख्यात अपराधी सुनील राठी का भाई सचिन राठी बताते हुए रामअवतार को अगले दिन आकर मिलने का हुक्म दिया था। जब पीड़ित ने मिलने का स्थान पूछा, तो कॉलर ने उसे पौड़ी जेल में मिलने के लिए बुलाया और बात न मानने पर जान से मारने की गंभीर धमकी दी। इस घटना के बाद पीड़ित की शिकायत पर थाना सहसपुर (देहरादून) में मुकदमा अपराध संख्या 31/2016 के तहत धारा 506 (आपराधिक धमकी) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
पुलिस ने जांच के दौरान सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के थाना बड़गांव अंतर्गत ग्राम मियानगी निवासी सुशील उर्फ धनंजय (पुत्र कदम सिंह) को आरोपी बनाया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट जतिन मित्तल ने इस मामले पर अपना अंतिम निर्णय सुना हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को मात्र संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में सुशील उर्फ धनंजय ही था। तदनुसार, कोर्ट ने सुशील उर्फ धनंजय को सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया। फैसले के बाद अधिवक्ता लोकेश शर्मा व विकास चौधरी ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने साक्ष्यों के निष्पक्ष और बारीक मूल्यांकन के आधार पर एक न्यायसंगत निर्णय दिया है।