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विशेष रिपोर्ट: राजस्थान में गहराता जल संकट चुनौतियां और समाधान की उम्मीद

विशेष संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में गर्मी का पारा चढ़ने के साथ ही पानी की किल्लत ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से लेकर राजधानी जयपुर, बीकानेर और सांचौर जैसे शहरी क्षेत्रों तक, पानी की बूंद-बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
​समस्या के मुख्य पहलू:
​गिरता भूजल स्तर: अत्यधिक दोहन के कारण राज्य के अधिकांश ब्लॉक 'डार्क जोन' में आ चुके हैं।
​नहरबंदी और तकनीकी रुकावटें: इंदिरा गांधी मुख्य नहर में मरम्मत के कारण सैकड़ों गांवों में जलापूर्ति बाधित हुई।
​प्रदूषित पानी की मार: कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी फ्लोराइड युक्त पानी पीने से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
​समाधान की दिशा में बढ़ते कदम:
​'मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0': राज्य सरकार द्वारा जल स्रोतों की पहचान के लिए GIS मैपिंग और ड्रोन सर्वे जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। सूखे पड़े बोरवेलों को वाटर रिचार्जिंग यूनिट्स में बदला जा रहा है।
​जल जीवन मिशन (JJM): हर घर तक नल से जल पहुंचाने के संकल्प के तहत पाइपलाइन बिछाने के काम में तेज़ी लाई जा रही है।
​आधुनिक कृषि तकनीक: किसानों को बूंद-बूंद सिंचाई (Drip Irrigation) और फव्वारा पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
​निष्कर्ष यह है कि पानी के संकट को केवल सरकार के भरोसे हल नहीं किया जा सकता, इसके लिए जनभागीदारी और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को हर घर का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।

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