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"कोई देश नक्शे पर खींची गई लाइनों या इमारतों से नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों से बनता है।"

हरबंस सिंह (एडवाइजर, शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन पंजाब) ने पत्रकारों से अपने विचार शेयर करते हुए कहा कि हमारे देश के नेता कहते हैं कि भारत को बेहतर बनाना है, लेकिन यह गलत है। भारतीयों को पढ़ा-लिखाकर बेहतर बनाओ, भारत खुद बेहतर बन जाएगा। इसमें गहरी सच्चाई है। नेता अक्सर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर या इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स को बेहतर बनाने की बात करते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि जब तक देश के नागरिकों का मेंटल और एजुकेशनल डेवलपमेंट नहीं होगा, तब तक कोई भी तरक्की परमानेंट नहीं हो सकती। ह्यूमन डेवलपमेंट सबसे ज़रूरी क्यों है? जब एक आम भारतीय पढ़ा-लिखा और जागरूक होगा, तो वह समाज की बुराइयों, करप्शन और गंदगी के खिलाफ खड़ा होगा। सरकारों को कानून लागू करने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, लोग खुद ज़िम्मेदार बनेंगे। एजुकेशन सिर्फ नौकरी पाने के लिए ही नहीं, बल्कि नए आइडिया और इनोवेशन पैदा करने के लिए भी ज़रूरी है। जब देश के युवा स्किल्ड होंगे, तो देश अपने आप इकोनॉमिकली मज़बूत हो जाएगा। एक पढ़ा-लिखा और समझदार नागरिक कभी भी जाति, धर्म या फ्री सुविधाओं के लालच में वोट नहीं पाएगा। वह सही मांगेगा। सवाल, जिससे नेताओं को भी सुधार करना होगा। अगर हम सिर्फ़ सड़कें, पुल या बड़ी-बड़ी इमारतें बनाते रहेंगे लेकिन उनका इस्तेमाल करने वाले लोगों की सोच नहीं बदलेंगे, तो वह तरक्की सिर्फ़ दिखावा बनकर रह जाएगी। इसलिए, 'इंडिया' को बदलने की शुरुआत 'इंडियन' को बदलने से होनी चाहिए। हमारे मौजूदा एजुकेशन सिस्टम में सबसे ज़्यादा ज़रूरी बदलाव क्या है ताकि हम सिर्फ़ डिग्री होल्डर ही नहीं, बल्कि असल में 'बेहतर और ज़िम्मेदार नागरिक' बना सकें?
🍳*हरबंस सिंह, एडवाइज़र* 🙏🏻
शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन पंजाब +91-8054400953,

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