पन्द्रह साल बाद भी नहीं हो पाईं ठीए बन्दी!
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी कहते हैं कि किसानों के राजस्व के भूमि संबंधी मामले प्राथमिकता और पारदर्शिता के आधार पर निस्तारित किये जाने चाहिए। वर्तमान में ठीए बन्दी के लिए राजस्व सहिंता 2006 की धारा 24 में स्पष्ट उल्लेख है कि आवेदन के 90 दिन के भीतर ठीए बन्दी का कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए। लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ और है।
सुआवाला के 85 वर्षीय किसान रमेश कुमार अपने खेत की ठीए बन्दी के लिए लगातार 15 वर्षों से तहसील, जिला एवं मंडल के न्यायालयों के चक्कर काट कर और लाखों रुपये किराये और वकीलों की फीस पर खर्च कर, राजस्व कर्मचारियों की हठधर्मिता एवं उदासीनता के कारण आज तक खाली हाथ है।
रमेश कुमार ने 30/05/2011 को जिला बिजनौर तहसील धामपुर ब्लॉक अफजलगढ़ के राजस्व गाँव मुरादनगर के गाटा संख्या 111 की ठीए बन्दी का आवेदन पत्र तत्कालीन राजस्व की धारा 41 LR Act के तहत परगनाधिकारी धामपुर के न्यायालय में किया था, जिसकी वाद संख्या D201813160002103 थी। ठीए बन्दी खाम हेतु राजस्व निरीक्षक का एक दिन का वेतन दिनांक 09/06/2011 को रुपये 800 ट्रेजरी चालान द्वारा राजकोष में जमा कराया गया। दिनांक 17 जून 2011 को राजस्व निरीक्षक द्वारा ठीए बन्दी खाम की कार्रवाई की गई, आख्या दस माह बाद 4 अप्रैल 2012 को न्यायालय में जमा की गई। रिपोर्ट भू चित्र के अनुरूप नहीं थी। न्यायालय द्वारा बार-बार बुलाने पर भी, राजस्व निरीक्षक न्यायालय नहीं आए। 10 जून 2016 को फाइल बिजनौर एडीएम प्रथम के न्यायालय में पहुचीं। राजस्व निरीक्षक एडीएम प्रथम के न्यायालय में नहीं पहुंचे। फिर फाइल दिनांक 10 जून 2023 को तहसील धामपुर में पुनः परगनाधिकारी धामपुर के न्यायालय में आयी। तेरह वर्ष बाद राजस्व निरीक्षक 06 मई 2024 को न्यायालय में उपस्थित हुए। 07 जून 2024 को परगनाधिकारी ने राजस्व निरीक्षक की आख्या निरस्त की साथ ही तकनीकी आधार बताते हुए कि आवेदन पत्र में सहखातेदार पक्षकार नहीं है ठीए बन्दी का आवेदन पत्र भी निरस्त कर दिया। परगनाधिकारी धामपुर के आदेश को मण्डलायुक्त मुरादाबाद के न्यायालय में चुनौती दी गई। मंडलायुक्त न्यायालय में वाद संख्या-सी 202413000001971 धारा - 24(4) दायर हुई। दिनांक 23/09/2024 को मंडलायुक्त न्यायालय द्वारा परगनाधिकारी धामपुर के आदेश को निरस्त कर दिया गया। मंडलायुक्त ने परगनाधिकारी धामपुर के आदेश को विधिक त्रुटि मानते हुए निर्देश दिया कि - " यदि राजस्व निरीक्षक की आख्या त्रुटिपूर्ण थी तो पुनः आख्या प्राप्त की जा सकती थी और सहखातेदार को भी पक्षकार बनाया जा सकता था। अपील कर्ता की अपील ग्राह्यता के स्तर पर स्वीकार की जाती है। अवर न्यायालय को निर्देशित किया जाता है कि अवर न्यायालय पुनः आख्या प्राप्त कर एवं सहखातेदार को पक्षकार बनाते हुए उभय पक्षों को साक्ष्य एवं सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करने के उपरांत वाद का गुण दोष के आधार पर निस्तारण करें।"
दिनांक 23 सितम्बर 2024 को मंडलायुक्त के आदेश की प्रति दिनांक 29 नवम्बर 2024 को न्यायालय परगनाधिकारी धामपुर को दी गई। परगनाधिकारी धामपुर ने 03 दिसम्बर 2024 को तहसीलदार को सहखातेदार को पक्षकार बनाने एवं पैमाइश आख्या उपलब्ध कराने के आदेश दिए।
मंडलायुक्त के आदेश के एक वर्ष आठ माह बाद और 300 से ज्यादा तारीखों पर चक्कर काटने के बाद भी आज तक ठीए बन्दी खाम नहीं हो पाई है।