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मुस्कुराइए, आप डिजिटल युग के बिहपुर में हैं! यहाँ चाँद पर पहुँचने की बातें होती हैं, लेकिन कई गाँवों में 157 घंटे से बिजली पहुँचने का रास्ता नहीं मिल

मुस्कुराइए, आप डिजिटल युग के बिहपुर में हैं!

यहाँ चाँद पर पहुँचने की बातें होती हैं, लेकिन कई गाँवों में 157 घंटे से बिजली पहुँचने का रास्ता नहीं मिल रहा।

अमरपुर, लत्तीपुर, गौरीपुर और आसपास के लोग गर्मी, अंधेरे और परेशानियों से जूझ रहे हैं, जबकि जिम्मेदार लोग आश्वासनों की रोशनी में आराम फरमा रहे हैं।

आरोप यह भी है कि बिजली आपूर्ति और मरम्मत कार्य में व्यक्ति विशेष को देखकर प्राथमिकता तय की जा रही है। यदि ऐसा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। बिजली किसी की कृपा नहीं, जनता का अधिकार है।

और जनप्रतिनिधि ?
जनता पूछ रही है कि आखिर 157 घंटे की परेशानी पर उनकी आवाज़ कहाँ है? चुनाव के समय घर-घर पहुँचने वाले चेहरे संकट की घड़ी में दिखाई क्यों नहीं दे रहे?

डिजिटल इंडिया का यह कैसा दृश्य है, जहाँ मोबाइल में 5G का सिग्नल है, लेकिन घरों में बल्ब की रोशनी नहीं!

जनता का संदेश साफ है—

"अंधेरे में सिर्फ घर नहीं डूबे हैं, जिम्मेदारों की संवेदनशीलता भी कहीं खो गई है।"

157 घंटे का अंधेरा केवल बिजली विभाग की विफलता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की चुप्पी की भी कहानी कह रहा है।
जनता जवाब चाहती है, बहाने नहीं।
Dr Nawal Kishor Samrat Choudhary Bhagalpur District Administration Energy Department, Bihar PMO India CMO Bihar
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