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राहुल गांधी का बड़ा बयान: 'पार्टी में मेरे भी विरोधी हैं, पर बदला लेना कांग्रेस की विचारधारा नहीं'


राजस्थान में आयोजित जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग वर्कशॉप के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संगठन के भीतर अंदरूनी कलह और मतभेदों पर एक बेहद भावुक और रणनीतिक बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राहुल गांधी ने मंच से ईमानदारी के साथ स्वीकार किया कि खुद पार्टी के भीतर कई लोग ऐसे मौजूद हैं जो उनके खिलाफ काम करते हैं, उनके विरोधी हैं या उन्हें अपना दुश्मन मानते हैं। उन्होंने कहा कि एक शीर्ष नेता होने के नाते अगर वह चाहें तो अपनी शक्ति और अधिकारों का इस्तेमाल करके उन विरोधियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई कर सकते हैं, उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं या उनके राजनीतिक करियर को पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी बात को एक बड़ा वैचारिक मोड़ देते हुए स्पष्ट किया कि वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं करेंगे, क्योंकि निजी दुश्मनी निभाना, बदला लेना या विरोध की आवाजों को ताकत के बल पर कुचल देना न तो उनकी व्यक्तिगत फितरत है और न ही यह कांग्रेस पार्टी की मूल विचारधारा का हिस्सा है।

उन्होंने ट्रेनिंग में मौजूद जिला अध्यक्षों को यह गहरा संदेश दिया कि कांग्रेस पार्टी सभी को साथ लेकर चलने, लोकतांत्रिक संवाद बनाए रखने और आंतरिक विरोध का सम्मान करने की नीति पर चलती है, जहां तानाशाही या प्रतिशोध की भावना के लिए कोई जगह नहीं है। राहुल गांधी के इस बयान को राजनीति के जानकार पार्टी के भीतर अनुशासन और लोकतंत्र के बीच एक महीन संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। इस भाषण के जरिए उन्होंने एक तरफ जहां अपने गुप्त विरोधियों को यह साफ चेतावनी दे दी है कि वह उनकी हरकतों से पूरी तरह वाकिफ हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद को एक उदार और बड़े दिल वाले नेता के रूप में पेश किया है जो सत्ता या पद के अहंकार में आकर अपने ही लोगों का नुकसान नहीं करता।

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