चौथे स्तंभ की मजबूती से ही लोकतंत्र की मजबूती संभव हिंदी पत्रकारिता दिवस पर वक्ताओं का आह्वान
मेरठ, 30 मई। “चौथे स्तंभ की मजबूती से ही लोकतंत्र की मजबूती संभव है।” यह विचार हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया न्यूजपेपर संगठन के तत्वावधान में तथा सोशल मीडिया संगठन के सानिध्य में अन्नपूर्णा मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
वक्ताओं ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लोकतंत्र की सफलता बहुत हद तक पत्रकारिता की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर वक्ताओं ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ठीक 200 वर्ष पूर्व कोलकाता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा हिंदी का पहला समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ प्रकाशित किया गया था। इस पत्र ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आजादी की अलख जगाने का कार्य किया।
वक्ताओं ने कहा कि संयोगवश उसी दिन नारद जयंती भी थी, इसलिए नारद जी को विश्व का प्रथम एवं आदि पत्रकार माना जाता है। उनकी बात सदैव विश्वसनीय मानी जाती थी और यही गुण आज भी पत्रकारिता की आत्मा है।
कार्यक्रम में कहा गया कि हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में ‘स्वराज’ साप्ताहिक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसके कई संपादकों को अंग्रेजी शासन के अत्याचार सहने पड़े और जेल जाना पड़ा, लेकिन उनकी कलम कभी झुकी नहीं। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता ने समय के साथ निरंतर नए आयाम स्थापित किए हैं। पहले पत्थरों और कबूतरों के माध्यम से संदेश भेजे जाते थे, जबकि आज समाचार केवल पढ़े और सुने ही नहीं जाते, बल्कि सीधे देखे भी जाते हैं।
महाभारत काल का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने कहा कि लगभग 6000 वर्ष पूर्व हस्तिनापुर में बैठे महाराज धृतराष्ट्र ने संजय के माध्यम से कुरुक्षेत्र का आंखों देखा हाल सुना था, जिससे स्पष्ट होता है कि संचार की अद्भुत परंपरा प्राचीन काल में भी विद्यमान थी।
वक्ताओं ने कहा कि संचार क्रांति के इस युग में पत्रकारिता ने लंबी यात्रा तय की है। जहां एक ओर पत्रकारिता ने नई ऊंचाइयों को छुआ है, वहीं उसकी विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठे हैं। इसके बावजूद आज भी प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता कायम है। पत्रकारों द्वारा लिखा गया प्रत्येक शब्द महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उसी के आधार पर समाज अपनी धारणा बनाता है और वही आगे चलकर इतिहास का हिस्सा बन जाता है।
कार्यक्रम में कहा गया कि पत्रकार समाज का दर्पण होता है, जो समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करता है। पत्रकारों से अनुरोध किया गया कि वे पत्रकारिता के आदर्शों और सिद्धांतों पर चलते हुए समाज को नई दिशा दें, ताकि देश का युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभा सके। साथ ही यह भी कहा गया कि टीआरपी और दर्शक संख्या की अंधी दौड़ में पत्रकारों को निष्पक्षता और सामाजिक सरोकारों को नहीं भूलना चाहिए।
कार्यक्रम में सोशल मीडिया संगठन एवं ऑल इंडिया न्यूजपेपर संगठन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों, महिलाओं तथा अतिथियों को दुपट्टा, साफा एवं तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एससी-एसटी आयोग के सदस्य नरेंद्र सिंह खजूरी, मौलाना मसूदुर रहमान शाहीन, जमाली चतुर्वेदी, नीरज कांत राही, पुष्पेंद्र शर्मा, प्रदीप वत्स, रामभूल तोमर, नरेश उपाध्याय, सुमित मोहन शर्मा, हर्षवर्धन बीटन, डॉ. सुधाकर आशावादी, नरेश दत्त, रमेश चंद शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, नईम अहमद, अंकित बिश्नोई, डॉ. नयन, श्रीमती सरबजीत गुमान, श्रीमती प्रिया रस्तोगी, श्रीमती किरण बिश्नोई, श्रीमती नताशा नरेंद्र जैन, दीप जैन, डॉ. कर्मेंद्र सिंह, सरदार सरबजीत कपूर, महेश चंद शर्मा, डॉ. गजेंद्र शर्मा, पुनीत सिंघल, राजीव लोचन गोयल सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी यशपाल सिंह ने की तथा संचालन रवि कुमार बिश्नोई ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।