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अर्चना चिटनिस ने ली बैठक, केला फसल की वास्तविक स्थिति समझकर करें सर्वे

अर्चना चिटनिस ने ली बैठक, केला फसल की वास्तविक स्थिति समझकर करें सर्वे

रिपोर्टर -
भगवानदास शाह


बुरहानपुर। 24 एवं 30-31 मई 2026 को जिले में आए तेज आंधी, तूफान एवं खराब मौसम ने किसानों की मेहनत पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया। जिले के अनेक गांवों में खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, विशेषकर केला उत्पादक किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों की इस पीड़ा को देखते हुए विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर खेतों में पहुंचकर नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लिया था। इसी क्रम में श्रीमती चिटनिस ने राजस्व, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के संयुक्त सर्वे दल, जनप्रतिनिधियों एवं किसानों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित कर अधिकारियों को प्रेजेंटेशन के माध्यम से सर्वे की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सर्वे कार्य पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ किया जाए तथा किसी भी किसान के साथ अन्याय न हो।
बैठक में श्रीमती चिटनिस ने कहा कि किसान पूरे वर्ष कठिन परिश्रम कर अपनी फसल तैयार करता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उसकी उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे समय में प्रशासन का दायित्व है कि वह तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराए।
*केला फसल की वास्तविक स्थिति समझकर करें सर्वे*
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अधिकारियों को विशेष रूप से केला फसल के सर्वे को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर केले की फसल पूरी तरह जमीन पर गिर चुकी है, जबकि अनेक पौधे बाहर से सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं लेकिन अंदर से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि केला अत्यंत संवेदनशील फसल है। तेज हवा या तूफान से एक बार पौधा हिल जाने पर उसकी वृद्धि रुक जाती है और वह आर्थिक रूप से अनुपयोगी हो जाता है। कई खेतों में पौधे जमीन पर गिरकर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि जो पौधे खड़े दिखाई दे रहे हैं, वे भी मृतप्राय स्थिति में हैं और आने वाले कुछ दिनों में पूरी तरह खराब हो जाएंगे।
*पीड़ित किसानों से सद्भावनापूर्वक संवाद करें, पूर्व सूचना देकर पहुंचें खेतों तक*
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने सर्वे दल को निर्देशित किया कि केवल खोड़ (केले के पौधों) की संख्या के आधार पर आकलन न किया जाए, बल्कि वास्तविक क्षति का प्रतिशत आधारित मूल्यांकन किया जाए, ताकि किसानों को उनकी वास्तविक हानि के अनुरूप राहत मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पीड़ित किसानों के साथ सद्भावनापूर्वक संवाद करें, उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनें और उन्हें पूरा सम्मान दें। किसानों को पूर्व सूचना देकर बताया जाए कि सर्वे दल कब उनके खेतों पर पहुंचेगा, ताकि वे स्वयं उपस्थित रहकर अपनी क्षति से अधिकारियों को अवगत करा सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वे कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए तथा कोई भी पात्र किसान सर्वे से वंचित न रहे।
श्रीमती चिटनिस ने यह भी निर्देश दिए कि सर्वे पूर्ण होने के बाद क्षतिपूर्ति एवं मुआवजा प्राप्त करने वाले पात्र किसानों की सूची संबंधित ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक रूप से चस्पा की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। किसानों को यह जानकारी आसानी से उपलब्ध हो कि सर्वे में उनका नाम दर्ज हुआ है अथवा नहीं और उन्हें मुआवजा मिलने की पात्रता प्राप्त हुई है या नहीं। उन्होंने निर्देश दिए कि सूची चस्पा होने के पश्चात अगामी 5 दिवस तक किसानों से दावे एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाएं, ताकि यदि किसी पात्र किसान का नाम छूट गया हो अथवा सर्वे संबंधी कोई त्रुटि हो तो उसका समय रहते निराकरण किया जा सके। इसके उपरांत अंतिम सूची तैयार कर राहत एवं मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की हितैषी भाजपा सरकार ने 50 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर प्रति हेक्टेयर 2 लाख रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या त्रुटि स्वीकार नहीं की जाएगी।
श्रीमती चिटनिस ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे हर स्तर पर लगातार प्रयास कर रही हैं और यह सुनिश्चित करेंगी कि प्रभावित किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी 6/4) के अंतर्गत नियमानुसार क्षतिपूर्ति मुआवजा प्राप्त हो।
*उद्यानिकी फसलों को बीमा दायरे में लाने के लिए सरकार गंभीर*
बैठक को संबोधित करते हुए श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री एवं उद्यानिकी मंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्यानिकी फसलों को पूर्ण रूप से बीमा दायरे में लाने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे देश और प्रदेश के इतिहास में उद्यानिकी फसलों के लिए आरबीसी 6/4 के तहत मुआवजा मिलना अत्यंत दुर्लभ रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। जब तक उद्यानिकी फसलों के लिए स्थायी बीमा व्यवस्था लागू नहीं हो जाती, तब तक सरकार प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 2 लाख रुपए तथा अधिकतम 6 लाख रुपए तक मुआवजा दिलाने के लिए प्रयासरत है।
*समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे सहायता*
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि ईश्वर की कृपा से हमारा जीवन तभी सार्थक बनता है जब हम समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर सकें। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य स्वयं स्वावलंबी बनना और देश को आत्मनिर्भर एवं विकसित बनाने में योगदान देना है। यदि ईश्वर ने हमें सामर्थ्य दिया है तो हमारा पहला कर्तव्य उन लोगों के आंसू पोंछना है जो कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
*किसानों के नाम पर राजनीति करने वालों को जनता पहचानती है*
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि वे विपक्ष पर अनावश्यक टिप्पणी नहीं करना चाहतीं, लेकिन जनता सब जानती है। जिन्होंने अपने कार्यकाल में सड़क, बिजली, पानी, बांध और ट्रांसफार्मर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं, वे आज किसानों के नाम पर घडि़याली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल घोषणाएं नहीं करती, बल्कि किसानों के कल्याण के लिए धरातल पर ठोस और परिणामकारी कार्य करके दिखाती है। उन्होंने पुनः दोहराया कि प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने और अधिकतम राहत उपलब्ध कराने के लिए उनके प्रयास लगातार जारी रहेंगे तथा किसी भी किसान को निराश नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में शाहपुर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष रामभाउ सोनवणे, शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि वीरेन्द्र तिवारी, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, जिला पंचायत सदस्य किशोर पाटिल, गोपाल चौधरी, विनोद चौधरी, रवि जैन, देवानंद पाटिल, दिनकर महाजन, गणेश महाजन, कृषि विभाग के उपसंचालक मनोहर देवके, डिप्टी कलेक्टर सृजन श्रीवास्तव, उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक एसआर चौहान, नायब तहसीलदार गोविंदसिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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