मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष **रघुनाथ सिंह नेगी** ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई।
उत्तराखंड देहरादून
*विकासनगर:** प्रदेश भर के सरकारी विभागों एवं निगमों में प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों का लगातार हो रहा शोषण अब जन संघर्ष मोर्चा को बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष **रघुनाथ सिंह नेगी** ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां कर्मचारियों को पे-स्लिप देने से लगातार मना कर रही हैं, जो एक गंभीर शोषण का मामला है।
नेगी ने कहा, "**एजेंसियों द्वारा पे-स्लिप न देना कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है। इससे कर्मचारी न तो अपनी सैलरी की सही जानकारी ले पाते हैं और न ही भविष्य में किसी कानूनी लड़ाई में इसका इस्तेमाल कर पाते हैं। यह साफ तौर पर शोषण है।**"
उन्होंने बताया कि पूरे उत्तराखंड में हजारों कर्मचारी विभिन्न विभागों और निगमों में आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ईपीएफ, ईएसआई जैसी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। पे-स्लिप न मिलने की समस्या इन कर्मचारियों के शोषण को और बढ़ा रही है।
जन संघर्ष मोर्चा अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो मोर्चा बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेगा।
**मांगें:**
- सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित रूप से पे-स्लिप उपलब्ध कराई जाए।
- वेतन का पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- न्यूनतम मजदूरी व अन्य कानूनी सुविधाओं का पूर्ण अनुपालन हो।
यह मुद्दा अब पूरे प्रदेश में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जन संघर्ष मोर्चा का यह प्रयास इन उपेक्षित कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।