असम में जून से सस्ती मसूर दाल, चीनी और नमक की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद, मुफ्त चावल मिलता रहेगा :-
असम सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित की जाने वाली रियायती दर की मसूर दाल, चीनी और नमक की आपूर्ति को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम वित्तीय एवं बजटीय प्रक्रियाओं के कारण उठाया गया है और इसका उद्देश्य किसी भी कल्याणकारी योजना को स्थायी रूप से समाप्त करना नहीं है।
खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था जून 2026 से प्रभावी होगी। विभाग ने बताया कि वर्तमान में राज्य में वोट-ऑन-अकाउंट व्यवस्था लागू होने के कारण बजटीय सीमाएं उत्पन्न हुई हैं, जिसके चलते इन वस्तुओं की रियायती आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक असम विधानसभा के जुलाई सत्र में राज्य बजट को विधायी स्वीकृति प्राप्त नहीं हो जाती। विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बजट पारित होने के बाद अगस्त 2026 से योजना के पुनः शुरू होने की संभावना है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मई 2026 के आवंटन से बचा हुआ मसूर दाल, चीनी और नमक का स्टॉक अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के पात्र लाभार्थियों को उनके निर्धारित अधिकार के अनुसार वितरित किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पहले से उपलब्ध सामग्री का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंच सके।
इस बीच सरकार ने आम जनता और राशन कार्डधारकों को आश्वस्त किया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाले मुफ्त चावल के वितरण पर इस निर्णय का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुफ्त चावल की आपूर्ति और वितरण पूर्ववत जारी रहेगा और लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
राज्य सरकार ने लोगों से धैर्य बनाए रखने और सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, जो बजट स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण लागू की गई है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बजटीय स्वीकृति मिलते ही रियायती दर पर मसूर दाल, चीनी और नमक की आपूर्ति पुनः शुरू कर दी जाएगी।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने यह भी कहा है कि आम लोगों को किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल सरकारी अधिसूचनाओं तथा आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।