उम्मीद : स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों का बड़ा दावा।चूहों में हमेशा के लिए खत्म की डायबिटीज, इंसानों के इलाज की जगी नई उम्मीद।
अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने डायबिटीज के इलाज को लेकर एक बड़ी सफलता हासिल करने का दावा किया है। शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान चूहों में ब्लड शुगर को स्थायी रूप से नियंत्रित करने में सफलता पाई। इस शोध ने दुनियाभर में मधुमेह के इलाज को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रयोग खासतौर पर टाइप-1 डायबिटीज पर केंद्रित था, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को खुद ही नष्ट कर देता है। स्टैनफोर्ड की टीम ने स्टेम सेल तकनीक और जीन एडिटिंग की मदद से नई इंसुलिन उत्पादक कोशिकाएं तैयार कीं। इन कोशिकाओं को चूहों के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया, जिसके बाद उनके शरीर में ब्लड शुगर सामान्य स्तर पर पहुंच गया और लंबे समय तक नियंत्रित रहा।
शोधकर्ताओं का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नई कोशिकाओं पर हमला न करे। इसके लिए वैज्ञानिकों ने कोशिकाओं में ऐसे बदलाव किए जिससे इम्यून सिस्टम उन्हें नुकसान न पहुंचा सके। यही वजह रही कि चूहों में डायबिटीज दोबारा नहीं लौटी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक इंसानों पर भी सफल रहती है, तो भविष्य में डायबिटीज के मरीजों को रोज इंसुलिन इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इंसानों पर परीक्षण और सुरक्षा संबंधी अध्ययन अभी बाकी हैं, इसलिए इसे तत्काल इलाज नहीं माना जा सकता।
दुनियाभर में करोड़ों लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। भारत में भी मधुमेह तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। ऐसे में स्टैनफोर्ड का यह शोध चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं, इंसुलिन और जीवनशैली संबंधी नियम जारी रखने चाहिए। यह शोध भविष्य की संभावना जरूर दिखाता है, लेकिन आम इलाज बनने में अभी समय लग सकता है।