जून: क्या सचमुच आधे से ज्यादा भारतीयों का जन्मदिन इसी दिन दर्ज है?......एक लेख
लेखक, मो. जावेद शेख
उपसंपादक
राईट हेडलाईन्स नाशिक
भारत में 1 जून की तारीख एक दिलचस्प वजह से चर्चा में रहती है। आम धारणा है कि देश के आधे से ज्यादा लोगों का जन्मदिन सरकारी दस्तावेजों में 1 जून दर्ज है। हालांकि "आधे से ज्यादा" का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह सच है कि लाखों लोगों की जन्मतिथि 1 जून लिखी गई है।
दरअसल, पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म पंजीकरण की व्यवस्था इतनी मजबूत नहीं थी। कई लोगों के पास जन्म का सटीक रिकॉर्ड नहीं होता था। जब स्कूल में दाखिले, नौकरी, सरकारी दस्तावेज या अन्य प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत पड़ती थी, तब अनुमानित जन्मतिथि दर्ज की जाती थी।
कई राज्यों में स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में सुविधा के लिए 1 जून को जन्मतिथि के रूप में दर्ज करने की प्रथा चल पड़ी। खासकर उन बच्चों के लिए जिनकी वास्तविक जन्मतिथि ज्ञात नहीं होती थी। चूंकि जून में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होती थी, इसलिए 1 जून को एक सुविधाजनक और मानक तारीख माना गया।
यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोगों के आधार, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, सेवा पुस्तिका और अन्य दस्तावेजों में 1 जून जन्मतिथि दर्ज मिलती है। खासकर 40 से 70 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में यह प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि आधे से ज्यादा भारतीयों का जन्मदिन 1 जून है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि 1 जून भारत की सबसे आम दर्ज जन्मतिथियों में से एक है।
डिजिटल रिकॉर्ड और जन्म पंजीकरण व्यवस्था मजबूत होने के बाद अब नवजात बच्चों की वास्तविक जन्मतिथि दर्ज की जा रही है। इसलिए आने वाली पीढ़ियों में इस तरह की प्रवृत्ति धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
भारत के कई गांवों और कस्बों में आज भी मजाक में कहा जाता है कि "अगर जन्मतिथि याद नहीं है, तो 1 जून लिख दो", क्योंकि इस तारीख के साथ लाखों लोगों का नाम जुड़ा हुआ है।