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भाजपा प्रशिक्षण वर्ग से सीधे खेतों में पहुंचीं अर्चना चिटनिस,

भाजपा प्रशिक्षण वर्ग से सीधे खेतों में पहुंचीं अर्चना चिटनिस,


रिपोर्टर -
भगवानदास शाह


आंधी-तूफान से प्रभावित किसानों के बीच बिताया समय, अधिकारियों को दिए तत्काल सर्वे के निर्देश
बुरहानपुर। जिले में 30 एवं 31 मई की मध्यरात्रि आए तेज आंधी-तूफान और खराब मौसम ने केला उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शाहपुर, धामनगांव, बंभाड़ा, बख्खारी, रायगांव, खामनी, नीमगांव, मैथा, खारी, फोफनार, मोहद सहित अनेक ग्रामों में हजारों एकड़ क्षेत्र में खड़ी केले की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई है, जबकि अनेक खेतों में पौधे खड़े दिखाई देने के बावजूद अंदरूनी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
आंधी-तूफान से फसलों को हुए व्यापक नुकसान की सूचना मिलते ही विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रशिक्षण वर्ग के कार्यक्रमों के बीच से समय निकालकर रविवार प्रातः प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और नुकसान का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
श्रीमती चिटनिस ने शाहपुर-धामनगांव मार्ग, खामनी सहित आसपास के प्रभावित गांवों में खेतों का निरीक्षण करते हुए कहा कि किसान पूरे वर्ष अपनी मेहनत, पूंजी और उम्मीदों को फसल में लगाता है, लेकिन प्राकृतिक आपदाएं उसकी मेहनत पर अचानक संकट खड़ा कर देती हैं। ऐसे समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे किसानों के साथ खड़े होकर उन्हें राहत दिलाने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
निरीक्षण के दौरान श्रीमती चिटनिस ने खेतों में गिरे केले के पौधों, क्षतिग्रस्त फसलों और किसानों की स्थिति को गंभीरता से देखते हुए राजस्व, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को तत्काल सर्वे प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का आकलन पूरी पारदर्शिता और वास्तविकता के आधार पर होना चाहिए, ताकि कोई भी प्रभावित किसान राहत से वंचित न रहे।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि केला फसल सामान्य फसल नहीं है। तेज हवा और तूफान के कारण कई पौधों की ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है। अनेक पौधे बाहर से सुरक्षित दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी उत्पादन क्षमता समाप्त हो जाती है और वे कुछ दिनों में पूरी तरह खराब हो जाते हैं। इसलिए केवल गिरे हुए पौधों की संख्या दर्ज करने के बजाय फसल को हुए वास्तविक नुकसान का प्रतिशत आधारित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए शासन द्वारा निर्धारित प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। जहां 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, वहां नियमानुसार क्षतिपूर्ति प्रदान करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रशासन से सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए।
श्रीमती चिटनिस ने कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर राजस्व, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की संयुक्त टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजने तथा प्रत्येक खेत का गंभीरता से निरीक्षण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका और भविष्य इस फसल से जुड़ा हुआ है, इसलिए राहत वितरण में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में वे उनके साथ मजबूती से खड़ी हैं। किसानों को हुए नुकसान की भरपाई और उचित मुआवजा दिलाने के लिए शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जाएंगे तथा आरबीसी 6ध्4 सहित उपलब्ध सभी प्रावधानों के अंतर्गत राहत दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि किशोर पाटिल, अशोक पाटिल, अमोल पाटिल, जनपद पंचायत सदस्य दिवाकर कोली, सुनील महाजन, प्रदीप महाजन, राजेंद्र पाटिल, डिप्टी कलेक्टर एवं तहसीलदार श्रृजन श्रीवास्तव, तहसीलदार गोविंदसिंह रावत, कृषि विभाग के उपसंचालक मनोहर देवके, उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी जेएल बर्डे, सहित जनप्रतिनिधि, किसान एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि किसानों की मेहनत और उनकी फसल हमारे क्षेत्र की समृद्धि का आधार है। प्राकृतिक आपदा से हुए इस नुकसान की भरपाई के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। पीडि़त किसानों को मुआवजा मिले, यह सुनिश्चित किया जाएगा।

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