श्री मद भागवत कथा मे श्रद्धांलुओं की रही मौजूदगी. विधायक श्री शंकर लाल डेचा ने भी किया कथा श्रवन
श्रीमद्भागवत कथा पूर्णाहुति अवसर पर भावपूर्ण उद्बोधन
आज सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ की पूर्णाहुति के पावन अवसर पर हृदय भाव-विभोर है। इन सात दिनों में पूज्य व्यासपीठ से अनेक दिव्य प्रसंगों का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
पूज्य महाराज श्री ने हनुमान चालीसा के महत्व और प्रभाव का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया हनुमान चालीसा का पाठ जीवन के संकटों को दूर कर आत्मबल प्रदान करता है।
रुक्मिणी प्रसंग के माध्यम से भगवान के प्रति अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास की प्रेरणा मिली। वहीं कृष्ण-सुदामा प्रसंग ने सच्ची मित्रता, विनम्रता और निष्काम प्रेम का अद्भुत संदेश दिया। भगवान भाव के भूखे हैं, वैभव के नहीं।
महाराज श्री ने यह भी बताया कि नाम संकीर्तन से जीवन धन्य बन जाता है। कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कीर्तन ही सबसे सरल एवं श्रेष्ठ साधन है।
इस शुभ अवसर पर हमारे बीच पधारे आदरणीय Shankar Lal Decha विधायक महोदय का व्यासपीठ की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हैं। आपका सान्निध्य हम सभी के लिए गौरव का विषय है।
आज कथा की पूर्णाहुति के इस क्षण में एक ओर मन आनंदित है कि हमें सात दिनों तक अमृतमयी कथा का श्रवण प्राप्त हुआ, तो दूसरी ओर हृदय भावुक भी है। कथा के अंतिम क्षणों में भक्तों की नम आंखें इस बात का प्रमाण हैं कि कथा केवल कानों से नहीं, हृदय से सुनी गई है।
"यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात्।
विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे॥"
अर्थात् जिन भगवान के मात्र स्मरण से जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है, उन प्रभु को बारम्बार प्रणाम है।
आइए, कथा से प्राप्त संस्कारों, सद्विचारों और भक्ति को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें। यही इस श्रीमद्भागवत कथा की सच्ची पूर्णाहुति होगी।
जय श्रीकृष्ण!
जय श्रीमद्भागवत महापुराण! 🙏🌹