सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर, गौमाता की दुर्दशा चिंताजनक : शंकराचार्य
बांदा, उत्तर प्रदेश। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने अपनी 81 दिवसीय "गविष्टि यात्रा" के दौरान गौमाता की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की फाइलों और योजनाओं में गौमाता की सेवा एवं संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में देशभर में हजारों गायें भूख, बीमारी और उपेक्षा के कारण मरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपरा की आधारशिला है, इसलिए उसका संरक्षण केवल धार्मिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है।
शंकराचार्य ने कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने विभिन्न राज्यों और विधानसभा क्षेत्रों में गौवंश की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, जहां अनेक स्थानों पर गायों की हालत अत्यंत दयनीय पाई गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गौ संरक्षण के प्रति गंभीर है तो गौशालाओं की स्थिति में सुधार, निराश्रित गौवंश के लिए पर्याप्त चारे-पानी की व्यवस्था तथा प्रभावी संरक्षण नीति लागू करनी चाहिए।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावों के समय गौमाता के नाम पर बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को भुला दिया जाता है। उन्होंने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग दोहराते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए गौवंश संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गविष्टि यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में संतों, श्रद्धालुओं एवं गौभक्तों ने शंकराचार्य का स्वागत किया तथा गौ संरक्षण के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से भी गौसेवा और गौसंरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।