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15 साल बाद मिला बिछड़ा परिवार, माँ से लिपटकर फूट-फूट कर रोया बेटा- अपना घर आश्रम ने फिर निभाया मानवता का धर्म

कोटा/भरतपुर/अपना घर आश्रम में आज का दिन भावनाओं से सराबोर रहा। 15 वर्षों से बिछड़ी माँ *मोहिनी* का जब अपने बेटे *गोवर्धन* से मिलन हुआ तो आश्रम का हर कोना नम आँखों का गवाह बन गया।

मार्मिक मिलन का दृश्य
इतने लंबे अंतराल के बाद जैसे ही गोवर्धन ने अपनी माँ को देखा, वह दौड़कर माँ के पैरों से लिपट गया और फूट-फूट कर रोने लगा। बेटी *संगीता* भी माँ के गले से लिपटकर बिलख पड़ी। पति *बाबूलाल* की आँखें भी इस दृश्य को देखकर छलक उठीं। वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँखें इस माँ-बेटे के पुनर्मिलन पर नम हो गईं।

9 साल पहले मिली थी लावारिस
आज से 9 वर्ष पूर्व मोहिनी झालावाड़ जिले के दांगीपुरा थाना क्षेत्र के बामन गाँव में लावारिस अवस्था में घूम रही थी। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थी। तब थानाधिकारी *गोकुल प्रसाद* ने मनोहरथाना उपखण्ड अधिकारी के आदेश पर उन्हें अपना घर आश्रम, कोटा में भिजवाया था।

इलाज से लौटी याददाश्त, फिर मिली पहचान
अपना घर आश्रम में नियमित चिकित्सा, पौष्टिक भोजन और आत्मीय देखभाल के बाद मोहिनी के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ। मानसिक स्थिति बेहतर होने पर वह अपने परिजनों के बारे में बताने लगी। उसने बताया कि वह प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली है।

आश्रम के कार्यकर्ताओं ने तुरंत *अरनोद थाना, प्रतापगढ़* से संपर्क किया। थाने के सहयोग से सूचना उसके परिवार तक पहुँचाई गई, जो पीपलखूँट तहसील के सोडलपुर गाँव में रहता है।

खुशी से दौड़े चले आए परिजन
सूचना मिलते ही मोहिनी का पति बाबूलाल, बड़ा बेटा गोवर्धन और बेटी संगीता अपना घर आश्रम पहुँचे। 15 साल के बिछोह के बाद परिवार को एक होते देख आश्रम परिवार की आँखें भी नम हो गईं।

संस्था संदेश
अपना घर आश्रम के जुड़े सेवा साथियों कार्यकर्ताओं ने कहा, "हम सिर्फ आश्रय नहीं देते, हम टूटे हुए रिश्तों को जोड़ते हैं। एक माँ को उसका परिवार लौटाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं। यह प्रभु की कृपा और हमारी टीम की मेहनत का फल है।"

मानवता की मिसाल
यह घटना बताती है कि सेवा, धैर्य और करुणा से नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। अपना घर आश्रम ऐसे हजारों बेसहारा, मानसिक विमंदित प्रभुजनों की सेवा कर उन्हें नया जीवन दे रहा है।

अपना घर आश्रम का संकल्प: कोई बेसहारा न रहे, कोई भूखा न सोए, कोई परिवार से बिछड़ा न रहे।

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"15 साल बाद माँ मोहिनी से मिलकर बेटा गोवर्धन भावुक हुआ। साथ में पति बाबूलाल, बेटी संगीता एवं अपना घर आश्रम की टीम का आभार व्यक्त किया।"

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