कोकराझार में साल के पेड़ों की अवैध कटाई मामले में वीसीडीसी अध्यक्ष गिरफ्तार, बीटीसी से करीबी संबंधों की भी चर्चा :-
असम के कोकराझार जिले में संरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध कटाई के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने जलबिला वीसीडीसी (𝐕𝐢𝐥𝐥𝐚𝐠𝐞 𝐂𝐨𝐮𝐧𝐜𝐢𝐥 𝐃𝐞𝐯𝐞𝐥𝐨𝐩𝐦𝐞𝐧𝐭 𝐂𝐨𝐦𝐦𝐢𝐭𝐭𝐞𝐞) के अध्यक्ष अबुल शेख को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर महामाया वन क्षेत्र से बहुमूल्य साल के पेड़ों की कथित अवैध कटाई और उनके परिवहन में संलिप्त होने का आरोप है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग को लंबे समय से महामाया वन क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए अबुल शेख को हिरासत में लिया।
सूत्रों के मुताबिक, आरोप है कि संरक्षित वन क्षेत्र से बड़ी मात्रा में साल के पेड़ों को काटकर अवैध रूप से बाहर ले जाया जा रहा था। साल की लकड़ी बाजार में अत्यंत मूल्यवान मानी जाती है और इसके कारण वन तस्करों द्वारा इसकी अवैध कटाई की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।
गिरफ्तारी के बाद वन अधिकारियों ने अबुल शेख को पुलिस के हवाले कर दिया। उन्हें बोगरीबारी क्षेत्र से हिरासत में लेकर पहले स्थानीय स्तर पर पूछताछ की गई और बाद में आगे की जांच के लिए कोकराझार सदर पुलिस स्टेशन स्थानांतरित कर दिया गया।
इस बीच, स्थानीय स्तर पर यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अबुल शेख के वर्तमान बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) प्रशासन के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ निकट संबंध रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या जांच अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वन विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मामले की जांच अभी जारी है और अवैध कटाई के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा है कि संरक्षित वनों में अवैध कटाई केवल पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि जैव विविधता, वन्यजीवों के आवास और क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा।