वास्तुदोष से व्यापार घाटा और उद्योग बंद होने की संभावना
डॉ. शर्मा ने बताया कि ईशान, अग्नि, नैऋत्य तथा पश्चिम दिशा के कुछ विशेष भागों में बने द्वार उद्योगों को भारी आर्थिक हानि पहुँचा सकते हैं, जिससे व्यापारिक घाटा, आग लगने की घटनाएँ, दुर्घटनाएँ, चोरी तथा वित्तीय अस्थिरता जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। उद्योगों में पिट (गड्ढों) का भी वास्तु अनुसार विशेष महत्व है। गलत स्थान पर बने पिट उद्योग की प्रगति में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं जबकि उत्तर और पूर्व दिशा में बने पिट लाभकारी होते हैं। इसके अलावा, दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में कार्यालय या भंडारण की अनुचित स्थिति व्यापार को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञों से वास्तु परीक्षण और सुधार आवश्यक होता है।