"पॉक्सो एक्ट के आरोपी पुजारी विजय पंडित की रिहाई के लिए धरना प्रदर्शन एवं कमेडियन मनीष पटेल को सीधे जैल रीवा पुलिस प्रशासन सवालों के घेरे में"
उत्तरप्रदेश के सहारनपुर के मंदिर के पुजारी विजय पंडित ने 10 वर्ष की दलित बालिका के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की ऐसा आरोप है, बच्ची के सोर मचाने पर वहां लोगों ने उसे बचाया और विजय पंडित को पुलिस के हवाले किया और गिरफ्तार पॉक्सो एक्ट के तहत किया गया ,जिसे निकलवाने लिए वहां के ब्राह्मण वर्ग (दोस्तों में सभी को नहीं कह रहा)द्वारा गिरफ्तारी का विरोध किया गया और उसकी रिहाई के लिए विरोध में रामचरित मानस एवं हनुमान चालीसा का पाठ किया गया थाना परिसर में ऐसी मीडिया में खबरें चल रहीं हैं,जो एक तरफ से धार्मिक ग्रंथों का अपमान किया गया और इतना ही नहीं भगवान को भी बदनाम किया इस (सभी ने नहीं)वर्ग ने,ऐसा ही कुकृत्य कौशांबी में हुआ था, जिसके पक्ष में उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय ब्रजेश पाठक जी भी खड़े थे,जैसा आज देखने को मिल रहा है,जिसकी खबरें इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया ने नहीं चलाईं, परन्तु कमेडियन मनीष पटेल रीवा मध्यप्रदेश ने व्यंग्य किया होगा जातिवादियों के लिए तो,उसकी खबरें सभी ने चलाईं और चल रही हैं,जिससे प्रतीत होता है की जाति देखकर ही यह सब हो रहा है, वरना 10 वर्ष की बालिका के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश करने वाले विजय पंडित की खबरें क्यों नहीं चलीं?, कुछ हो बुरा इसी जातिवादी वर्ग को ही क्यों लगता है? जबकि जातिवादी तो हर वर्ग में हैं ,अभी जगतगुरु रामभद्राचार्य को ही देख लीजिए अपनी ही जाति के ब्राह्मण वर्ग को नीच अधम तक कहा है जो मीडिया में है मैं नहीं कहता। सभी वर्गों की महिलाओं पर जगतगुरु रामभद्राचार्य, अनिरुद्धा आचार्य, धीरेन्द्र शास्त्री ने अभद्र टिप्पणी की तब जातिवादियों की भावना आहत नहीं होती, इतना ही नहीं जाति को लेकर एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग को अपमानित करने के लिए कहावत,गाना बने तो इस वर्ग की भावना भावना नहीं होती, सिर्फ जातिवादियों की ही भावना आहत क्यों होती है?और किसी की नहीं।यादव को कथा कहने पर अपमानित किया, मध्यप्रदेश में देविका पटेल को कथा कहने पर विरोध किया, दलित एवं आदिवासी को भ्रष्ट किया,तब कहां रहते हो जातिवादियों,अभी हाल ही में एक ब्राह्मण मुझसे अभद्र भाषा में बात कर रहा था, जैसे मैंने उसकी सम्पत्ति हड़प ली हो। मैं ऐसे ही बात नहीं करता सबके मेरे पास प्रमाण हैं। इसलिए मनीष पटेल रीवा ने ऐसा कोई दुष्कृत्य नहीं किया,जिससे उसको जैल हो,परन्तु जातिवादियों के दबाव के कारण न्यायापालिका भी बौनी लग रही है,वरना मनीष पटेल को जमानत मिल जाती,क्योंकि न्याय का मंदिर सबक लिए बराबर है,किसी एक जाति की बपौती नहीं है,वह बाहर आएगा और उससे भी अधिक जातिवादियों के विरुद्ध वैचारिक प्रहार करेगा। मनीष कमेडियन की रिहाई हो सभी एससी,एसटी,ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, जमानत मिलेगी, सरकार बलात्कारी राम-रहीम परोल दे सकती है, परन्तु एक कलाकार जमानत नहीं दे सकती।