सात समंदर पार से प्रकाशित हुआ सनातन का महाग्रंथ फौजी लेखक नरेश वैष्णव निम्बार्क का ऐतिहासिक कार्य
**रामनगर, ३० मई २०२६**
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इतिहास में आज एक ऐतिहासिक क्षण आया। राम की पावन नगरी रामनगर से सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं अंतरराष्ट्रीय इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा रचित महाग्रंथ **"जगतगुरु निम्बार्काचार्य — सनातन के सूर्य"** का हिंदी संस्करण अमेरिका से प्रकाशित हुआ।
२७४ पृष्ठों का यह महाग्रंथ ५१२२ वर्ष प्राचीन सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा का प्रथम प्रामाणिक दस्तावेज़ है। अंग्रेज़ी एवं गुजराती संस्करण १ जून २०२६ को प्रकाशित होंगे।
ग्रंथ का भव्य विमोचन ७ जून २०२६ को ग्राम लूम्ब, तहसील बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश में सम्पन्न होगा।
लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने दशकों के अनथक शोध के उपरांत इस ग्रंथ में हंस भगवान से जगतगुरु निम्बार्काचार्य तक की अटूट परंपरा, पद्म पुराण में वर्णित निम्बार्क तीर्थ का इतिहास तथा राधा-कृष्ण उपासना के मूल स्रोत को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया है।
अधिक जानकारी हेतु —
www.nareshswaminimbark.in
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जय श्री निम्बार्काचार्य
जय सनातन
जय हिंद