logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल, 2026 पास होने से जुड़ी पूरी और विस्तृत जानकारी

असम UCC बिल, 2026: मुख्य बिंदु और नए नियम
​मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस ऐतिहासिक विधेयक को विधानसभा में ध्वनि मत (Voice Vote) से पास कराया है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश का तीसरा राज्य बन गया है जिसने अपनी विधानसभा में UCC बिल पारित किया है।
​इस नए कानून के तहत राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक समान कर दिया गया है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
​1. बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण प्रतिबंध
​नए कानून के तहत राज्य में बहुविवाह (एक से अधिक शादी करने) पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
​यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है (यानी 'Bigamy' या 'Polygamy' का दोषी पाया जाता है), तो उसके लिए 7 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है।
​2. लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
​असम में अब किसी भी लिव-इन रिलेशनशिप को 30 दिनों के भीतर पंजीकृत (रजिस्टर) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
​यदि कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन में रहता है, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।
​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और 'धोखे या जबरदस्ती' (तथाकथित लव जिहाद) जैसी स्थितियों पर रोक लगाना है।
​3. विवाह और तलाक के नियम
​शादी का रजिस्ट्रेशन भी समारोह के 60 दिनों के भीतर कराना जरूरी होगा। नियम का पालन न करने पर ₹10,000 का जुर्माना लग सकता है।
​शादी के लिए कानूनी उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष तय की गई है।
​हालांकि, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधताओं का सम्मान करते हुए, शादियां किसी भी मौजूदा धार्मिक रीति-रिवाज या पारंपरिक पद्धति से संपन्न की जा सकेंगी, लेकिन उनका पंजीकरण अनिवार्य होगा।
​4. उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकार
​बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार (Inheritance) में समान अधिकार दिए गए हैं। इसके साथ ही बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण और अधिकारों को भी इसमें सुरक्षित किया गया है।
​👥 जनजातीय समुदायों (Scheduled Tribes) को छूट
​विधेयक में साफ किया गया है कि यह कानून असम में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सदन में तर्क दिया:
​"जनजातीय समुदायों के पास सदियों से अपनी पारंपरिक और प्रथागत व्यवस्थाएं हैं। वे बहुविवाह का समर्थन नहीं करते, बेटियों को समान अधिकार देते हैं और लिव-इन को मान्यता नहीं देते। वे एक तरह से सदियों से खुद ही UCC का पालन कर रहे हैं, इसलिए हम उन पर इसे थोपना नहीं चाहते।"
​🏛️ विधानसभा में हंगामा और विपक्ष का विरोध
​विधेयक को पारित करने के दौरान असम विधानसभा में भारी हंगामा देखने को मिला:
​विपक्ष की मांग: कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित विपक्षी दलों ने मांग की थी कि इस बिल को अधिक व्यापक चर्चा के लिए 'सलेक्ट कमेटी' (Select Committee) के पास भेजा जाए।
​सदन से वॉकआउट: विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास द्वारा विपक्ष की इस मांग को खारिज करने के बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन के वेल (Well) में आकर नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध दर्ज कराया।
​पारित प्रक्रिया: विपक्ष के भारी शोर-शराबे और सत्तापक्ष के 'भारत माता की जय' और 'जय श्री राम' के नारों के बीच स्पीकर ने ध्वनि मत से बिल को पास घोषित कर दिया।
​🔄 अगला कदम
​विधानसभा से पारित होने के बाद, मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विधेयक को अब असम के राज्यपाल और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की अंतिम सहमति मिलते ही इसे पूरे राज्य में आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

0
141 views

Comment