खाना-पान की सामग्री में मिलावट बनी उपभोक्ताओं की जान का दुश्मन
प्रदेश अध्यक्ष अरूण तिवारी ने जताई चिंता
खाना-पान की सामग्री में मिलावट बनी उपभोक्ताओं की जान का दुश्मन
प्रदेश अध्यक्ष अरूण तिवारी ने जताई चिंता
रिपोर्ट -
भगवानदास शाह
जिला बुरहानपुर मध्यप्रदेश
जिला बुरहानपुर :- शहर एवं ग्रामीणों के है हॉट बाजारों में वर्तमान समय में खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। दूध, घी, तेल, मसाले, मिठाइयों से लेकर रोजमर्रा में उपयोग होने वाली कई खाद्य सामग्री में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता की जिंदगी खतरे में पड़ती जा रही है। इस गंभीर विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए उपभोक्ता अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरूण तिवारी ने कहा कि मिलावटी खाद्य सामग्री समाज के लिए “धीमा जहर” साबित हो रही है।
लाभ कमाने की लालसा में कुछ व्यापारी और असामाजिक तत्व खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से खिलवाड़ कर रहे हैं। नकली दूध, सिंथेटिक मावा, मिलावटी मसाले, कृत्रिम रंगों से तैयार मिठाइयां तथा घटिया तेल जैसी सामग्री उपभोक्ताओं के शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है। इससे पेट संबंधी रोग, लिवर की समस्या, किडनी प्रभावित होना, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों, शादी-विवाह के मौसम तथा बढ़ती मांग के समय मिलावटखोर अधिक सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई कई बार सीमित होकर रह जाती है। ऐसे में आम जनता को भी सतर्क रहे!
*खरीदारी के समय गुणवत्ता तथा प्रमाणिकता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है*
प्रदेश अध्यक्ष अरूण तिवारी ने राज्य सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की कि खाद्य पदार्थों की नियमित जांच, सघन अभियान और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि मिलावटखोरी पर प्रभावी रोक लग सके। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सख्त दंड और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्यवाही ही इस समस्या पर अंकुश लगा सकती है।
उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिना बिल के खाद्य सामग्री न खरीदें, पैकेजिंग, निर्माण तिथि और गुणवत्ता चिन्हों की जांच करें तथा किसी भी प्रकार की मिलावट की आशंका होने पर संबंधित विभाग अथवा उपभोक्ता मंच पर शिकायत दर्ज कराएं।
“स्वस्थ समाज का निर्माण शुद्ध भोजन से ही संभव है। यदि मिलावटखोरी पर समय रहते कठोर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का बड़ा संकट बन जाएगा।”
यह विषय आज केवल उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय सरोकार बन चुका है।