भारत कोयला गैसीकरण मिशन को मिली नई रफ्तार, 37,500 करोड़ की योजना से ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव
नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश को ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) परियोजनाओं को तेज गति देने का ऐलान किया है। कोयला मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य रोडशो में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री G. Kishan Reddy ने 37,500 करोड़ रुपये की नई वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की।
कार्यक्रम में कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey, कोयला मंत्रालय के सचिव Vikram Dev Dutt तथा कई वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कोयला गैसीकरण को बताया “राष्ट्रीय मिशन”
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के औद्योगिक परिवर्तन का आधार बनने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू कर चुकी है और अब अतिरिक्त 37,500 करोड़ रुपये की नई सहायता योजना से बड़े निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
क्या है कोयला गैसीकरण?
कोयला गैसीकरण एक आधुनिक तकनीक है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय गैस में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रक्रिया से मेथनॉल, अमोनिया, हाइड्रोजन, यूरिया और सिंथेटिक गैस जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत की आयात निर्भरता कम करने, घरेलू उद्योगों को मजबूत करने और स्वच्छ कोयला तकनीक को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
2.5 लाख करोड़ निवेश और रोजगार की संभावना
सरकार का अनुमान है कि इस पहल से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से कोयला उत्पादक और पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर
राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और एलएनजी, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया तथा कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद करेगी।
वहीं, सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने विशाल कोयला भंडार और तकनीकी क्षमता के बल पर स्वच्छ कोयला तकनीक में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है। उन्होंने बताया कि लगभग 25 नई गैसीकरण परियोजनाओं से करीब 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है।
“विकसित भारत 2047” विजन का हिस्सा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के नए युग में ले जा सकती है। सरकार इसे “विकसित भारत 2047” के विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।