logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

छत्तीसगढ़ में मानसून पर मौसम विभाग का गंभीर अनुमान

Raipur,29 May 2026।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल के मानसून को लेकर ऐसा पूर्वानुमान जारी किया है जो छत्तीसगढ़ जैसे वर्षा आधारित राज्यों की चिंता बढ़ा सकता है। विभाग के अनुसार जून से सितंबर तक देश में सामान्य से कम बारिश होने की सबसे अधिक संभावना है। मध्य भारत में भी वर्षा सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है, जिसका सीधा असर छत्तीसगढ़ पर पड़ सकता है। IMD के अपडेटेड लॉन्ग रेंज फोरकास्ट के मुताबिक 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में देशभर में वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का करीब 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने साफ कहा है कि इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सबसे ज्यादा है।

छत्तीसगढ़ के लिए क्यों अहम है यह चेतावनी

छत्तीसगढ़ मध्य भारत क्षेत्र का हिस्सा है। आईएमडी ने मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना सबसे अधिक बताई है। यही नहीं, मानसून कोर जोन (MCZ) में भी वर्षा सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है। यह वही क्षेत्र है जहां देश की बड़ी आबादी खेती के लिए सीधे बारिश पर निर्भर है। राज्य की खरीफ खेती, जलाशयों का भराव, भूजल स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। ऐसे में यदि पूर्वानुमान सही साबित होता है तो इसका असर कृषि उत्पादन से लेकर पेयजल व्यवस्था तक दिखाई दे सकता है।

रिपोर्ट में जल संकट की भी चेतावनी

आईएमडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सामान्य से कम बारिश की स्थिति कृषि, जल उपलब्धता, जलविद्युत उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पेयजल संसाधनों पर दबाव बढ़ने, सूखे की स्थिति बनने और हीट स्ट्रेस बढ़ने का जोखिम रहेगा।यानी यह केवल कम बारिश की कहानी नहीं है, बल्कि पानी की उपलब्धता पर भी असर डाल सकती है। यदि बारिश कम हुई तो बांधों और जलाशयों में पानी का संग्रह प्रभावित हो सकता है और भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ सकता है।

जून में भी राहत के संकेत नहीं

मौसम विभाग ने जून 2026 के लिए भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। विभाग का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जून के दौरान वर्षा सामान्य से नीचे रह सकती है।यह पूर्वानुमान संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ में लू वाले दिन बढ़ सकते हैं।कम बारिश की आशंका के साथ-साथ मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में जून के दौरान सामान्य से अधिक हीट वेव यानी लू वाले दिनों की संभावना भी जताई है। छत्तीसगढ़ उन राज्यों में शामिल है जहां सामान्य से ज्यादा लू पड़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

एल नीनो भी बढ़ा रहा चिंता

आईएमडी ने कहा है कि प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना है। आम तौर पर एल नीनो को भारतीय मानसून के कमजोर पड़ने से जोड़कर देखा जाता है। मौसम विभाग का मानना है कि मानसून सीजन के दौरान एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, जबकि हिंद महासागर में तटस्थ IOD बने रहने के संकेत हैं।

सरकारों को तैयारी की सलाह

रिपोर्ट में राज्यों और जिला प्रशासनों को जल संरक्षण, जल प्रबंधन, सूखा निगरानी, पेयजल उपलब्धता और हीट वेव से निपटने की तैयारी मजबूत करने की सलाह दी गई है।छत्तीसगढ़ के लिए यह पूर्वानुमान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य पहले से ही भीषण गर्मी झेल रहा है। यदि मानसून कमजोर रहता है तो इसका असर खेती, जल संसाधनों और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई दे सकता है।

पानी को तरसाता मौसम और कटते जंगल

जब मौसम विभाग सामान्य से कम बारिश और अधिक लू की आशंका जता रहा है, ऐसे समय में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि वन क्षेत्र में कमी स्थानीय तापमान, नमी और जल चक्र को प्रभावित कर सकती है।विदित हो कि छत्तीसगढ़ की विधानसभा के संकल्प प्रस्ताव के सर्वसम्मति से पारित होने और तमाम जानकारों के साथ विभिन्न सरकारी ग़ैर सरकारी संस्थाओं की रिपोर्ट में पेड़ कटाई जंगल उजाड़ने पर सीधी असहमति और इंकार के बावजूद मध्य भारत के सबसे समृद्ध वन क्षेत्र हसदेव अरण्य को पूरी तरह तबाह किया जा रहा है।हालिया दिनों केते एक्सटेंशन परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है इससे सात लाख पेड कटेंगे।जानकारों का दावा है कि जशपुर से लेकर बस्तर तक जंगल का यही हाल होने वाला है। नतीजा जनता को भुगतना होगा, वहीं जनता जो आज जंगल के तबाह होने के मुद्दे पर बेफिक्र सी है। वैसे भी सरकार खुद उद्योगपतियों के साथ हितबद्ध साक्षी बनकर मौजूद है।आलोचक टिप्पणी करते हैं-"सरकार जनता के लिए नहीं उद्योगपतियों के हित संवर्धन के लिए जुटी है।उद्योगपतियों के लिए यह समर्पण ऐसा है कि यदि उद्योगपति चाहें कि सरकार शीर्षासन करे तो सरकार वह भी करेगी।"

9
274 views

Comment