सिंगरौली से विशेष रिपोर्ट.एनसीएल में विस्थापितों का आरोप: बिना सूचना बंद किया गया ब्याज भुगतान, ग्रामीणों में आक्रोश.
एनसीएल में विस्थापितों का आरोप: बिना सूचना बंद किया गया ब्याज भुगतान, ग्रामीणों में आक्रोश
सिंगरौली से विशेष रिपोर्ट
सिंगरौली जिले में एनसीएल (Northern Coalfields Limited) के खिलाफ विस्थापित परिवारों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उनकी भूमि एवं संपत्ति अधिग्रहण के बदले मिलने वाला ब्याज भुगतान अचानक बिना किसी पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण के बंद कर दिया गया है। इस फैसले से प्रभावित परिवार आर्थिक संकट और असुरक्षा की स्थिति में पहुंच गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उनकी जमीन ली गई थी, तब उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि मुआवजे के साथ ब्याज का भुगतान भी नियमित रूप से किया जाएगा। लेकिन अब बिना किसी लिखित आदेश या सूचना के भुगतान रोक दिया गया है।
“हमारी जमीन ली, अब हमारा हक भी छीना”
प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और कंपनी द्वारा उनकी बात सुने बिना ही यह फैसला लिया गया। कई विस्थापित परिवारों का कहना है कि उनकी आजीविका पहले ही प्रभावित हो चुकी है और अब ब्याज बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
एक ग्रामीण ने कहा:
> “हमारी जमीन चली गई, रोजगार नहीं मिला और अब जो थोड़ा बहुत ब्याज मिलता था, वह भी बंद कर दिया गया। यह हमारे अधिकारों का हनन है।”
विस्थापितों की प्रमुख मांगें
विस्थापित परिवारों और ग्रामीण संगठनों ने प्रशासन और एनसीएल के सामने कई मांगें रखी हैं:
ब्याज बंद करने का लिखित आदेश सार्वजनिक किया जाए।
ब्याज बंद करने का कानूनी आधार स्पष्ट किया जाए।
प्रभावित परिवारों को पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी दी जाए।
अंतिम निर्णय होने तक ब्याज भुगतान पुनः शुरू किया जाए।
विस्थापितों को सुनवाई और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। स्थानीय संगठनों ने भी विस्थापितों के समर्थन में आवाज उठाई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पारदर्शिता और न्याय की मांग
विस्थापित परिवारों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीन ली गई, लेकिन बदले में उन्हें पर्याप्त रोजगार, पुनर्वास और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल सकी। अब ब्याज बंद होने से उनका भरोसा और कमजोर हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि मामले में पारदर्शिता बरती जाए और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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नारा
“जमीन हमारी – हक हमारा – ब्याज हमारा!”