नहीं रहे मोहब्बत का पैगाम बांटने वाले शायर डा.बशीर बद्र
नहीं रहे मोहब्बत का पैगाम बांटने वाले शायर डा.बशीर बद्र
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए... जैसी गजलों से मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी को नई आवाज देने वाले मशहूर शायर पद्मश्री डा. बशीर बद्र ने गुरुवार को दोपहर 12 बजे दुनिया को अलविदा कह दिया। बकरीद के दिन 91 वर्ष की उम्र में उन्होंने भोपाल के ईदगाह हिल्स स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उन्हें गजल को महलों की बंदिशों व भारी-भरकम शब्दों से आजाद कराने के लिए याद किया जाता है। आम बोलचाल और दिल को छू लेने वाली भाषा देकर उन्होंने गजल को
सीधे आम आदमी के दिलों की धड़कन बना दिया। गुरुवार को सूरज ढलने के बाद बड़ा बाग स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया किया गया। उनके परिवार में पत्नी डा. राहत बद्र और पुत्र तैय्यब हैं।