इंस्टा,फेसबुक और व्हाट्सएप चलाने के लिए देने पड़ेंगे पैसे। जानिए क्या है पूरा मामला।
पिछले कुछ दिन से सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि अब इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप इस्तेमाल करने के लिए लोगों को पैसे देने पड़ सकते हैं। इस खबर ने करोड़ों यूजर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि, सच्चाई थोड़ी अलग है और इसे सही तरीके से समझना जरूरी है।
दरअसल, मेटा अपनी कुछ सेवाओं में पेड फीचर्स और सब्सक्रिप्शन मॉडल को बढ़ावा दे रही है। यूरोप समेत कई देशों में कंपनी ने “एड फ्री सब्सक्रिप्शन” यानी विज्ञापन रहित सेवा का विकल्प शुरू किया है। इसके तहत अगर कोई यूजर इंस्टाग्राम और फेसबुक बिना विज्ञापन के इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे मासिक शुल्क देना पड़ सकता है।
व्हाटसअप भी सामान्य यूजर्स के लिए पूरी तरह से मुफ्त है। मैसेज भेजना, कॉलिंग, वीडियो कॉल और स्टेटस जैसी सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा। हालांकि, बिजनेस अकाउंट और कुछ एडवांस फीचर्स के लिए कंपनी पहले से ही चार्ज लेती है।जिस "रिचार्ज प्लान" या पैसों की बात हो रही है, वह दरअसल मेटा की एक वैकल्पिक (Optional) प्रीमियम सर्विस है, जिसे 'मेटा वेरिफाइड' (Meta Verified) कहा जाता है। यह कोई अनिवार्य टैक्स नहीं है, बल्कि एक चॉइस है।
इंस्टाग्राम पर भी आम यूजर्स के लिए फिलहाल कोई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। लेकिन भविष्य में कंपनी प्रीमियम फीचर्स, ब्लू टिक, एक्स्ट्रा सिक्योरिटी और विज्ञापन रहित अनुभव जैसी सेवाओं के लिए सब्सक्रिप्शन मॉडल ला सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियां अब केवल विज्ञापनों पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। डेटा प्राइवेसी नियमों और बढ़ते खर्चों के कारण कंपनियां नए कमाई के रास्ते तलाश रही हैं। इसी वजह से पेड सर्विसेज और सब्सक्रिप्शन मॉडल पर जोर बढ़ रहा है।
फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की बेसिक सेवाएं अभी मुफ्त हैं। अगर भविष्य में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो कंपनियां आधिकारिक घोषणा करेंगी। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हर खबर पर तुरंत भरोसा करने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना बेहतर होगा।