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'पेशेंट्स डे' पर PBT की बड़ी मांग: 'अवैध' पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल को तुरंत भंग करें राज्यपाल

कोलकाता, 28 मई 2026:
बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली के लिए संघर्ष करने वाली पंजीकृत संस्था 'पीपल फॉर बेटर ट्रीटमेंट' (PBT) ने आज 'पेशेंट्स डे' (रोगी दिवस) के अवसर पर पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल (WBMC) को तुरंत भंग करने की मांग की है। संस्था ने वर्तमान काउंसिल को "अवैध" बताते हुए आरोप लगाया है कि यह राज्य में "मेडिकल लापरवाही" (चिकित्सकीय लापरवाही) को बढ़ावा दे रही है।
​WBMC पर लगे गंभीर आरोप
​PBT के अध्यक्ष डॉ. कुणाल साहा द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जून 2022 के अपने एक फैसले में स्पष्ट किया था कि WBMC कानून की भावना के खिलाफ काम कर रही थी। संस्था का आरोप है कि वर्तमान में काउंसिल चलाने वाले अधिकांश डॉक्टर सदस्य कभी निर्वाचित ही नहीं हुए, बल्कि उन्हें तत्कालीन सत्तारूढ़ दल TMC के साथ करीबी संबंधों के कारण "तदर्थ" (Ad-hoc) सदस्यों के रूप में शामिल किया गया था। ये अवैध सदस्य ही डॉक्टरों के खिलाफ आने वाली लापरवाही की शिकायतों की जांच कर रहे हैं, जिससे दोषियों को बढ़ावा मिल रहा है।
​RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए PBT ने दावा किया कि डॉक्टरों के खिलाफ मिलने वाली 95% से अधिक शिकायतों को खारिज कर दिया जाता है।
​प्रेस रिलीज़ की मुख्य बातें और PBT की अन्य बड़ी लड़ाइयां:
​'पेशेंट्स डे' (रोगी दिवस) का महत्व: PBT हर साल 28 मई को 'पेशेंट्स डे' के रूप में मनाता है। 28 मई 1998 को ही डॉ. कुणाल साहा की पत्नी अनुराधा साहा की कोलकाता के कुछ प्रमुख डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण मृत्यु हो गई थी, जो भारतीय चिकित्सा-कानूनी इतिहास का सबसे बड़ा मामला बना।
​SSKM अस्पताल में भ्रष्टाचार का मुद्दा: पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी चिकित्सक की बेटी (जो कथित तौर पर अयोग्य हैं) को SSKM अस्पताल में प्रोफेसर नियुक्त किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी कर CBI जांच की मांग की है।
​शीर्ष डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा: बिधाननगर में WBMC के 6 शीर्ष सदस्यों (जिनमें डॉ. बीरुपाक्ष बिस्वास, अविक दे, निर्मल माजी, एस.एन. रॉय और के. महाता शामिल हैं) के खिलाफ चुनाव के दौरान डॉ. कुणाल साहा के साथ मारपीट और आपराधिक धमकी देने के आरोप में मुकदमा शुरू हो चुका है।
​लापरवाही के खिलाफ बड़ा फैसला: हाल ही में 6 मई 2026 को, राज्य आयोग द्वारा बेले व्यू क्लिनिक और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निरंजन भट्टाचार्य के खिलाफ मेडिकल लापरवाही के लिए 47 लाख रुपये का बड़ा जुर्माना लगाया गया है।
​PBT ने राज्यपाल से अपील की है कि वे इस भ्रष्ट और गैर-कानूनी काउंसिल को भंग कर एक नई पारदर्शी WBMC का गठन करें, ताकि जनता का डॉक्टरों पर विश्वास बहाल हो सके और निर्दोष मरीजों की जान बचाई जा सके।

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