स्वर्ग से कम नहीं उत्तराखंड की वादियां, आदि कैलाश-ओम पर्वत ने मोहा मन : उर्वशी दत्त बाली
काशीपुर। डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर एवं समाजसेविका श्रीमती उर्वशी दत्त बाली ने उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की यात्रा के दौरान प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय वादियां केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शांति देने वाली दिव्य धरोहर हैं।
उन्होंने बताया कि काशीपुर से शुरू हुआ सफर जैसे-जैसे पिथौरागढ़ और फिर गूंजी गांव की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे प्रकृति अपने अलग-अलग रंग दिखाने लगती है। रास्ते में ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां, कल-कल बहती नदियां और बादलों से घिरी चोटियां हर यात्री को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
श्रीमती बाली ने कहा कि पिथौरागढ़ में एक रात विश्राम करने के बाद अगली सुबह का सफर और भी रोमांचक हो जाता है। गूंजी की ओर जाते हुए कई स्थान ऐसे आते हैं जहां सड़कें बर्फीली चोटियों के बीच से गुजरती दिखाई देती हैं। जगह-जगह गिरते झरने और पहाड़ों से उतरती बर्फ का पानी इस यात्रा को बेहद खास बना देता है।
उन्होंने बताया कि गूंजी गांव पहुंचकर ऐसा महसूस होता है मानो प्रकृति ने अपनी सारी सुंदरता यहीं समेट दी हो। एक ओर ओम पर्वत की दिव्यता और दूसरी ओर आदि कैलाश की अद्भुत छवि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। मंदिरों में बजती घंटियां और “हर-हर महादेव” की गूंज वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना देती है।
उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि यहां का मौसम भी अपने आप में अनोखा है। दिन में हल्की धूप और शाम होते ही बढ़ती ठंड लोगों को अलग अनुभव कराती है। रातभर में पहाड़ों पर गिरती बर्फ सुबह सफेद चादर का दृश्य प्रस्तुत करती है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
उन्होंने पहाड़ी गांवों के लोगों की सादगी और आत्मीयता की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार वहां के लोग बेहद सरल और मेहमाननवाज हैं। घर जैसा अपनापन, गर्म चाय और पारंपरिक भोजन यात्रियों के दिल में हमेशा के लिए यादें छोड़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यदि कोई व्यक्ति सच्ची शांति और प्रकृति के करीब जाना चाहता है तो उसे एक बार उत्तराखंड के इन दिव्य स्थलों की यात्रा जरूर करनी चाहिए। यहां का हर दृश्य भगवान शिव की उपस्थिति का एहसास कराता है।