हरदोई जनपद मे दहेज की भूख ने ली एक और बेटी की जान, कार्रवाई के इंतजार में इंसाफ
हरदोई जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने समाज और सिस्टम दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। थाना मल्लावां और बघौली क्षेत्र से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक नवविवाहिता की मौत नहीं, बल्कि दहेज के नाम पर बेटियों के टूटते सपनों और प्रशासनिक उदासीनता की भयावह तस्वीर है।
जिस बेटी को उसके भाई ने अपनी हैसियत से बढ़कर थार गाड़ी, करीब 5 लाख रुपये नगद और सोने-चांदी के जेवर देकर हंसते हुए विदा किया था, उसी बेटी की शादी के महज 1 माह 2 दिन बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आरोप है कि ससुराल पक्ष की लगातार प्रताड़ना, ताने और मानसिक उत्पीड़न ने उसे इतना तोड़ दिया कि उसने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
मरने से पहले युवती ने अपनी सास के फोन से भाई को कॉल कर रोते हुए कहा — “दादा… आज सास ने बहुत बातें सुनाई… आई एम सॉरी… आई लव यू… आई मिस यू… मुझे माफ कर देना…”
इसके बाद उसने जहरीले पदार्थ की तस्वीर भेजी और फोन कट गया। यह आखिरी संदेश अब भाई और परिवार के लिए जिंदगी भर का जख्म बन चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे जमीन पर क्यों दम तोड़ देते हैं? सरकारें “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे देती हैं, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की बातें होती हैं, लेकिन जब एक बेटी दहेज की आग में जलती है, तब सिस्टम की संवेदनाएं आखिर कहां चली जाती हैं?
परिजनों का आरोप है कि युवती को शादी के बाद से ही फोन तक इस्तेमाल नहीं करने दिया जाता था। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था और दहेज को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता था। बावजूद इसके, खबर लिखे जाने तक पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज न किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या एक बेटी की मौत के बाद भी कार्रवाई के लिए सबूतों का इंतजार किया जाएगा? क्या महिला उत्पीड़न और दहेज हत्या जैसे मामलों में भी पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा?
दहेज केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि वह अभिशाप है जो हर साल हजारों बेटियों की जिंदगी निगल रहा है। जरूरत है कि ऐसे मामलों में पुलिस तत्काल मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो, ताकि किसी और बहन का आखिरी संदेश “आई एम सॉरी भैया…” न बने।
अब पूरा जनपद इस सवाल का जवाब चाहता है कि आखिर इस बेटी को इंसाफ कब मिलेगा?