डाकपत्थर का 13 करोड़ का 'शॉपीस' अस्पताल: एक साल बीत गया, स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी शून्य
डाकपत्थर (विकासनगर): क्षेत्रवासियों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाए
डाकपत्थर का 13 करोड़ का 'शॉपीस' अस्पताल: एक साल बीत गया, स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी शून्य
डाकपत्थर (विकासनगर): क्षेत्रवासियों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के वादे के साथ शुरू हुई 13 करोड़ रुपये की परियोजना आज भी अधर में लटकी हुई है। चार मंजिला भव्य अस्पताल भवन तैयार होकर एक साल पहले स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया था, लेकिन आज तक यहां एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है।
वर्ष 2021 में शुरू इस परियोजना का निर्माण 2024 में पूरा हो गया था। लंबे समय तक खाली पड़े भवन को जनविरोध के बाद स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया गया। स्थानीय लोगों की उम्मीद थी कि अब जल्द ही यहां मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के रूप में सेवाएं शुरू हो जाएंगी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
लोगों की नाराजगी
स्थानीय लोगों ने बताया कि पूरा भवन वर्तमान में सिर्फ एक फार्मासिस्ट के भरोसे है। उन्होंने कहा, "सरकार ने इमारत तो बना दी, लेकिन डॉक्टर, स्टाफ और उपकरण भूल गई।"
लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही अस्पताल शुरू नहीं किया गया तो यह भव्य इमारत सिर्फ एक शॉपीस बनकर रह जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार एक साल में एक डॉक्टर तक नहीं लगा पाई, तो फिर इतने करोड़ रुपये खर्च करने का क्या मतलब था?
विकासनगर और आसपास के क्षेत्रों के गंभीर मरीजों को अभी भी देहरादून जाना पड़ता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि जल्द से जल्द विशेष चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और जरूरी मेडिकल उपकरणों की व्यवस्था की जाए।
सरकारी पक्ष
उप जिला चिकित्सालय विकासनगर के सीएमएस डॉ. प्रदीप चौहान ने बताया कि डाकपत्थर अस्पताल को संचालित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
स्थानीय मांग
लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि इस मसले को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पहले से ही बड़ी समस्या है। ऐसे में डाकपत्थर जैसे तैयार अस्पताल का बिना उपयोग के पड़ा रहना जनता के साथ अन्याय है।