छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज: भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, लापरवाही पर मंत्री की फटकार और फिजूलखर्ची पर लगी लगाम
रायपुर:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में इस समय प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। राज्य सरकार जहां एक तरफ कड़े फैसले लेकर व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलावों और औचक निरीक्षणों ने पूरे प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
इस प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक घटनाक्रम की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:
1. तहसील कार्यालय में मंत्री का औचक निरीक्षण, लापरवाही पर लगी कड़ी फटकार
रायपुर के तहसील कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। कार्यालय में काम की कछुआ चाल और आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान होते देख मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई और कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस प्रशासनिक कड़ाई पर राजनीति भी शुरू हो गई है; पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस वीडियो को लेकर सरकार की प्रशासनिक पकड़ पर तंज कसा है।
2. सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव: योग्यता का दायरा बढ़ा
युवाओं और रोजगार के लिहाज से सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय विभागों में भर्ती नियमों को अपग्रेड कर दिया है:
चौकीदार पद: अब इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को 8वीं से बढ़ाकर 12वीं पास कर दिया गया है।
ग्रेड-3 पद: इन पदों पर भर्ती के लिए अब ग्रेजुएशन (स्नातक) की डिग्री होना अनिवार्य कर दिया गया है।
정부 का मानना है कि इस बदलाव से प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता और कुशलता में सुधार होगा।
3. सरकारी खजाने पर कड़ा पहरा: 8 सूत्रीय वित्तीय अनुशासन लागू
राज्य सरकार ने फिजूलखर्ची को रोकने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 8 सूत्रीय कड़ा वित्तीय प्लान लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब राज्य का कोई भी मंत्री या बड़ा अधिकारी मुख्यमंत्री की लिखित और पूर्व स्वीकृति के बिना सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, महंगे होटलों में होने वाली बैठकों पर रोक लगा दी गई है और अब सभी विभागीय बैठकें केवल शासकीय भवनों या सर्किट हाउस में ही आयोजित की जाएंगी।
विपक्ष हमलावर, शासन मुस्तैद
इन फैसलों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। एक तरफ जहां विपक्ष इन नियमों और औचक निरीक्षणों को लेकर सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सचिवालय और वित्त विभाग इन कड़े नियमों को कड़ाई से जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े प्रशासनिक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।
ब्यूरो रिपोर्ट: यश जी,एमा मीडिया