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साड़ी मुरकौल में ईद-उल-जुहा की रही रौनक, हजारों दुआओं के बीच अदा हुई नमाज़, गले मिलकर दी मुबारकबाद।

साड़ी मुरकौल में ईद-उल-जुहा की रही रौनक, हजारों दुआओं के बीच अदा हुई नमाज़, गले मिलकर दी मुबारकबाद।
ईदगाह और मस्जिदों में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, कुर्बानी और भाईचारे के संदेश के साथ मनाया गया पर्व
जनपद चंदौली के शहाबगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम साड़ी मुरकौल के मस्जिद - ए - जंनतुल इस्लाम में ईद-उल-जुहा का पर्व इस वर्ष बड़े ही हर्षोल्लास, धार्मिक आस्था और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। सुबह से ही गांव में त्योहार की रौनक देखने को मिली। बच्चे नए कपड़ों में उत्साहित नजर आए तो वहीं बुजुर्ग और नौजवान ईद की नमाज़ की तैयारी में जुटे दिखाई दिए।
सुबह ठीक साढ़े सात बजे ईद-उल-जुहा की विशेष नमाज़ अदा की गई, जिसमें हाफिज अफजल अंसारी ने नमाज़ पढ़ाई और लोगों को कुर्बानी, इंसानियत तथा आपसी भाईचारे का पैगाम दिया। नमाज़ के दौरान मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी गई।
ईद की नमाज़ में आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। नमाज़ के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और पूरे गांव में खुशी का माहौल छा गया।
इस मौके पर मुख्य रूप से डॉ. ताजीमुद्दीन अहमद, इमरान अंसारी, तजमुल अंसारी, जोखन अंसारी, लियाकत अंसारी, बाबा कुतुबुद्दीन अंसारी, महबूब, महंगू,,बिस्मिल्ला अंसारी, शेरे जमा, सद्दाम, फरीद,फिरोज अंसारी, कमरुद्दीन अंसारी, मसिउल्ला अंसारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
गांव में कई घरों में बकरे की कुर्बानी दी गई। लोगों ने बताया कि ईद-उल-जुहा का पर्व हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम द्वारा अल्लाह की राह में दी गई कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार त्याग, समर्पण और इंसानियत का संदेश देता है।
नमाज़ और कुर्बानी के बाद लोगों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के घर जाकर सेवइयों और अन्य पकवानों का आनंद लिया। पूरे दिन गांव में मेल-मिलाप, खुशी और भाईचारे का माहौल बना रहा।
“ईद सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि मोहब्बत, कुर्बानी और इंसानियत का पैगाम है।”
“गले मिलकर लोगों ने नफरत मिटाने और भाईचारा बढ़ाने का संदेश दिया।”

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