असम यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को मिलेंगे समान कानूनी अधिकार :-
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि असम विधानसभा द्वारा पारित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को पूर्ण कानूनी मान्यता और पैतृक संपत्ति पर समान अधिकार प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान का उद्देश्य ऐसे बच्चों को सामाजिक और कानूनी स्तर पर किसी प्रकार के भेदभाव से बचाना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को उनकी वैधानिक पहचान, सम्मान और उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों से वंचित न किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे की सामाजिक स्थिति उसके जन्म की परिस्थितियों के आधार पर निर्धारित नहीं होनी चाहिए और राज्य सरकार समानता तथा न्याय के सिद्धांत पर कार्य कर रही है।
सरमा ने कहा कि यूसीसी का यह प्रावधान बच्चों के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत ऐसे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे और उन्हें अन्य बच्चों की तरह समान दर्जा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आधुनिक समाज में पारिवारिक संरचनाओं में परिवर्तन देखने को मिल रहा है और कानूनों को समय के अनुसार संवेदनशील तथा व्यावहारिक बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि किसी भी बच्चे को केवल सामाजिक परिस्थितियों के कारण भेदभाव का सामना न करना पड़े।
असम सरकार द्वारा लाए गए यूसीसी को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा जारी है। जहां कुछ वर्ग इसे सामाजिक सुधार और समान नागरिक अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ संगठनों और विपक्षी दलों ने इसके विभिन्न प्रावधानों पर सवाल भी उठाए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह बच्चों के अधिकारों और उत्तराधिकार संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे ऐसे बच्चों को भविष्य में संपत्ति विवाद और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
फिलहाल, असम सरकार यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया पर कार्य कर रही है और आने वाले समय में इससे संबंधित विस्तृत नियम एवं दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।