पंचायत-निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कहा – सरकार और आयोग अपील करें तो, पहले सुना जाए
पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर
प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव पर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की गई है। पूर्व विधायक और हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रहे संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है। लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि अगर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार और राज्य चुनाव आयोग अपील करते हैं तो पहले उन्हें सुना जाए। उनका पक्ष सुनने के बाद ही मामले में कोई आदेश पारित किया जाए।
दरअसल, पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर सरकार और चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से दिसंबर तक का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने 22 मई को फैसला सुनाते हुए 31 जुलाई तक चुनाव कराने का आदेश दिया था। ऐसे में संभावना है कि सरकार अथवा राज्य चुनाव आयोग हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं।
सरकार ने तय समय में नहीं कराए थे चुनाव
दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत-निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने तय समय में भी चुनाव नहीं कराए और हाईकोर्ट में चुनाव टालने का प्रार्थना-पत्र लगा दिया। सरकार ने सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने और अन्य परिस्थितियों के चलते अभी चुनाव नहीं कराया जाना बताया था।
इधर, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवड़ा का कहना था कि सरकार जानबूझकर पिछले डेढ़ साल से चुनाव टाल रही है।
नई डेडलाइन 31 जुलाई तय की थी
इस पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराने होंगे। वहीं ओबीसी आयोग से कहा कि वह 20 जून तक अपनी रिपोर्ट सबमिट करे।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि हमने जो समय चुनाव के लिए दिया था, उसमें भी 1 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। ओबीसी आयोग के गठन को 1 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। आयोग के इस ढुलमुल रवैये को पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के संचालन में बाधा नहीं बनने देंगे।
बारिश और भीषण गर्मी जैसे बहाने राजस्थान राज्य में मान्य नहीं हैं, क्योंकि यहां ऐसी कोई चरम मौसम स्थिति नहीं है, जिसे नागरिक सहन न कर सकें। राज्य सरकार या उसके अधिकारियों का कामकाज मौसम की स्थिति के कारण नहीं रुकता। चुनाव कराना सरकार का वैधानिक और अनिवार्य कर्तव्य है।