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बस्तर से रायपुर तक गूंजेगी न्याय की आवाज शीर्षक: मां दंतेश्वरी की पुजारिन को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी भीम आर्मी,

शीर्षक: मां दंतेश्वरी की पुजारिन को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी भीम आर्मी, बस्तर से रायपुर तक 'न्याय दो या प्राण लो' पदयात्रा शुरू
​विशेष संवाददाता, रायपुर/बस्तर
दिनांक: 27 मई, 2026
​बस्तर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। बस्तर की अगाध आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का केंद्र मानी जाने वाली मां दंतेश्वरी मंदिर की आदिवासी महिला पुजारिन श्रीमती लखमनी बघेल की पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने मोर्चा खोल दिया है। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए संगठन द्वारा बस्तर से राजधानी रायपुर तक “न्याय दो या प्राण लो” पदयात्रा अभियान का शंखनाद किया गया है।
​क्या है पूरा मामला?
​मिली जानकारी के अनुसार, बस्तर निवासी आदिवासी महिला श्रीमती लखमनी बघेल (पिता - स्व. लक्ष्मण बघेल) की लगभग 100 एकड़ से अधिक पैतृक भूमि वर्षों से विवादों में है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर इस बेशकीमती आदिवासी भूमि के आधे से अधिक हिस्से को 'नजूल' घोषित कर दिया गया, जिसके बाद बाहरी और प्रभावशाली भू-माफियाओं ने इस पर अवैध कब्जा कर लिया।
​पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने न्याय के लिए तहसील से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक के चक्कर काटे, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे, न्याय की मांग करने पर उन्हें स्थानीय रसूखदारों द्वारा डराने-धमकाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
​भीम आर्मी का पैदल मार्च: मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन
​आदिवासी महिला और मंदिर की पुजारिन के साथ हो रहे इस अन्याय के विरोध में भीम आर्मी छत्तीसगढ़ अब पूरी तरह से पीड़िता के साथ खड़ी हो गई है। संगठन के कार्यकर्ता पीड़ित महिला को साथ लेकर बस्तर से रायपुर तक पैदल मार्च कर रहे हैं। इस लंबी पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को सीधे हाथों-हाथ ज्ञापन सौंपकर त्वरित न्याय की मांग करना है।
​भीम आर्मी की प्रमुख मांगें:
​भीम आर्मी द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
​उच्च स्तरीय सीमांकन: पीड़िता की संपूर्ण 100 एकड़ पैतृक भूमि का विशेष राजस्व दल गठित कर तत्काल निष्पक्ष सीमांकन हो।
​भू-अधिकारों की बहाली: पुराने पट्टों और ऐतिहासिक खसरा रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक भूमि का मालिकाना हक वापस दिया जाए।
​अवैध नजूलकरण की जांच: आदिवासी जमीन को नजूल घोषित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और भू-माफियाओं के गठजोड़ की न्यायिक जांच हो।
​कब्जा मुक्ति व सुरक्षा: भूमि से तत्काल अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और लगातार मिल रही धमकियों के मद्देनजर पीड़ित परिवार को पुलिस संरक्षण दिया जाए।
​न्याय न मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
​भीम आर्मी के प्रांतीय नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल एक महिला की लड़ाई नहीं, बल्कि बस्तर के जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल न्याय प्रदान नहीं किया, तो पीड़ित महिला भीम आर्मी के सहयोग से रायपुर में मुख्यमंत्री निवास के समक्ष अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरने पर बैठने को विवश होगी।
​अब देखना यह है कि बस्तर के आदिवासियों के हितों की रक्षा का दावा करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार इस संवेदनशील मामले और भीम आर्मी की इस पदयात्रा पर क्या रुख अपनाती है।
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