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ट्रेनों की लेटलतीफी पर हाई लेवल मीटिंग: सरयू राय ने रेलवे को घेरा, जीएम बोले- अब पहले चलेगी यात्री ट्रेन, फिर मालगाड़ी

रेल यात्री संघर्ष समिति के आंदोलन के बाद हरकत में आया रेलवे प्रशासन, टाटानगर-चक्रधरपुर मंडल में रेलवे मोबिलिटी सुधार की कई बड़ी परियोजनाओं का ऐलान

जमशेदपुर:जमशेदपुर में लगातार ट्रेनों की लेटलतीफी, यात्री ट्रेनों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलने और रेल परिचालन की बदहाल स्थिति को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मंगलवार को एक महत्वपूर्ण हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। यह बैठक जमशेदपुर रेल यात्री संघर्ष समिति के आह्वान पर दक्षिण पूर्व रेलवे के शीर्ष अधिकारियों और समिति के प्रतिनिधियों के बीच हुई। बैठक में यात्रियों की समस्याओं, ट्रेनों की देरी, मालगाड़ियों के बढ़ते दबाव और रेलवे की भविष्य की योजनाओं पर गंभीर चर्चा हुई।
बैठक में समिति के संरक्षक एवं सरयू राय, समिति के संयोजक शिव शंकर सिंह, दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन, चक्रधरपुर मंडल के वरिष्ठ डीआरएम, डीआरएम सहित रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान सरयू राय और शिव शंकर सिंह ने ट्रेनों की लेटलतीफी का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया। सरयू राय ने कहा कि रेलवे की वर्तमान परिचालन व्यवस्था से आम यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के लगातार विलंब से केवल यात्रियों का समय ही बर्बाद नहीं हो रहा बल्कि इससे सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रेलवे को मालगाड़ियों से भले राजस्व मिलता हो, लेकिन यात्रियों के समय की बर्बादी से देश की उत्पादकता को कहीं अधिक नुकसान हो रहा है। सरयू राय ने रेलवे अधिकारियों के समक्ष पिछले डेढ़ महीने का ट्रेनों का लेट रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किया और कहा कि कई बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
बैठक में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर मालगाड़ियों को अत्यधिक प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि यात्री ट्रेनें घंटों तक आउटर और स्टेशनों पर खड़ी रहती हैं। उन्होंने साफ कहा कि यदि यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता नहीं दी गई तो आम जनता का आक्रोश और बढ़ेगा।
वहीं रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिव शंकर सिंह ने कहा कि टाटानगर और चक्रधरपुर मंडल से गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनें निर्धारित समय से काफी देर से चल रही हैं। इससे नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, मरीजों और लंबी दूरी के यात्रियों को गंभीर परेशानी उठानी पड़ रही है।
“अब पहले यात्री ट्रेनें चलेंगी”: जीएम अनिल कुमार जैन
बैठक में दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन ने समिति को भरोसा दिलाया कि रेलवे अब यात्री ट्रेनों की समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा कि अब पहले यात्री ट्रेनों को पास कराया जाएगा और उसके बाद मालगाड़ियों को परिचालन की अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ट्रेनों की लेटलतीफी की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई गई है और इसके लिए एक अलग अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। रेलवे प्रशासन लगातार परिचालन की समीक्षा कर रहा है और आने वाले समय में स्थिति में स्पष्ट सुधार दिखाई देगा।
जीएम ने यह भी कहा कि दक्षिण पूर्व रेलवे क्षेत्र में रेल मोबिलिटी और क्षमता बढ़ाने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद टाटानगर, आदित्यपुर, सिनी, राजखरसावां और चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की आवाजाही काफी सुगम हो जाएगी।
“एक सप्ताह तक करेंगे मॉनिटरिंग, नहीं सुधरी स्थिति तो आंदोलन जारी रहेगा”
बैठक के बाद सरयू राय ने कहा कि रेलवे महाप्रबंधक ने सुधार का आश्वासन दिया है, लेकिन अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि रेल यात्री संघर्ष समिति अगले एक सप्ताह तक ट्रेनों की स्थिति की मॉनिटरिंग करेगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी ट्रेनों की लेटलतीफी और परिचालन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि आम रेल यात्रियों के हित में चलाया जा रहा है।
रेलवे मोबिलिटी सुधार के लिए बड़े कदम, टाटानगर और चक्रधरपुर मंडल में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं तेज
दक्षिण पूर्व रेलवे ने टाटानगर और चक्रधरपुर रेल मंडल में परिचालन सुधार, यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी और माल एवं यात्री ट्रैफिक के बेहतर प्रबंधन के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन योजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेनों की गति बढ़ेगी, लेटलतीफी कम होगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
टाटा यार्ड से हटेंगी डायमंड क्रॉसिंग
रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी कि टाटा यार्ड में वर्तमान में कुल 29 डायमंड क्रॉसिंग मौजूद हैं, जो परिचालन और सुरक्षा दोनों दृष्टि से चुनौती बनी हुई हैं। इनमें से 9 डायमंड क्रॉसिंग को अक्टूबर 2026 तक हटाने का लक्ष्य रखा गया है।
शेष डायमंड क्रॉसिंग को टाटा यार्ड रिमॉडलिंग परियोजना के तहत हटाया जाएगा, जिसका लक्ष्य वर्ष 2029 निर्धारित किया गया है। इससे यार्ड की कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों में बड़ा सुधार होगा।
सालगाझारी-आदित्यपुर तीसरी लाइन से बढ़ेगी रफ्तार
सालगाझारी से आदित्यपुर तक तीसरी रेल लाइन का कार्य भी तेजी से चल रहा है। रेलवे के अनुसार टाटानगर नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के बाद अक्टूबर 2026 तक यह परियोजना पूरी कर ली जाएगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही और लाइन क्षमता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा।
388 नए ALP जल्द संभालेंगे जिम्मेदारी
रेलवे ने बताया कि वर्तमान में 388 सहायक लोको पायलट (ALP) प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और अगस्त 2026 तक वे कार्यभार संभाल लेंगे। इसके अलावा 220 ALP को लोको पायलट गुड्स सर्विस (LPGS) में प्रोन्नत किया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे मानव संसाधन की कमी दूर होगी और ट्रेन संचालन अधिक व्यवस्थित एवं तेज हो सकेगा।
कई स्टेशनों पर बनेंगी नई लूप लाइनें
रेलवे द्वारा विभिन्न स्टेशनों पर अतिरिक्त लूप लाइन निर्माण की भी योजना बनाई गई है ताकि ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हो सके और यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने में आसानी हो।
सिनी में अतिरिक्त लूप लाइन – जून 2026 तक
मानीकुई में दो लूप लाइन – मार्च 2027 तक
राजखरसावां, बराबांबू और लोटापहाड़ में एक-एक लूप लाइन – अक्टूबर 2027 तक
सोनुआ एवं टुनिया में लूप लाइन – दिसंबर 2027 तक
बहालदा रोड में नई लूप लाइन – अक्टूबर 2027 तक
इन परियोजनाओं से ट्रेनों की क्रॉसिंग और ओवरटेकिंग प्रक्रिया आसान होगी।
टाटा और आदित्यपुर में स्टेबलिंग लाइन परियोजना
टाटा मार्शलिंग यार्ड में रेक स्टेबलिंग के लिए ₹20.50 करोड़ की लागत से दो नई लाइनें दिसंबर 2027 तक तैयार की जाएंगी। वहीं आदित्यपुर में ₹28 करोड़ की लागत से तीन नई कोचिंग स्टेबलिंग लाइनें बनाई जाएंगी।
इससे रेक होल्डिंग क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के रखरखाव एवं संचालन में सुविधा होगी।
नए क्रॉसिंग और ब्लॉक स्टेशन की योजना
टाटा और हल्दीपोकुर के बीच ₹43.44 करोड़ की लागत से नया क्रॉसिंग स्टेशन बनाया जाएगा। इसका लक्ष्य दिसंबर 2027 रखा गया है।
इसके अलावा गोविंदपुर में ₹46.84 करोड़ की लागत से दो लूप लाइन सहित नया ब्लॉक स्टेशन मार्च 2028 तक तैयार किया जाएगा। इससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और परिचालन अधिक सुगम होगा।
सिनी-कांड्रा और चांडिल-गम्हरिया लाइन परियोजना
रेलवे ने सिनी-कांड्रा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना पर ₹286 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है, जिसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
वहीं चांडिल-गम्हरिया तीसरी एवं चौथी लाइन परियोजना ₹1112 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई है। रेलवे के अनुसार चौथी लाइन दिसंबर 2029 तक तथा तीसरी लाइन दिसंबर 2030 तक पूरी होगी।
कांड्रा, गम्हरिया और धुतरा में बनेंगे रेल फ्लाईओवर
रेलवे ने जानकारी दी कि कांड्रा और गम्हरिया में रेल फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा ताकि सतही क्रॉसिंग कम हो और सड़क यातायात बाधित न हो।
इसके अलावा धुतरा में भी मार्च 2027 तक रेल फ्लाईओवर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से कम होगा दबाव
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि डानकुनी से सूरत तक 2328 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की घोषणा की गई है। इसकी अनुमानित लागत करीब ₹1.8 लाख करोड़ होगी।
इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद चक्रधरपुर मंडल में मालगाड़ियों का दबाव काफी कम होगा, जिससे यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।
टाटानगर में नया कोचिंग टर्मिनल प्रस्तावित
टाटानगर के पास नए कोचिंग टर्मिनल के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा सिनी-राजखरसावां बाइपास लाइन (पांड्रासाली से कांड्रा) के लिए भी FLS प्रस्तावित है।
रेलवे का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से टाटानगर और चक्रधरपुर मंडल में रेल परिचालन को नई गति मिलेगी।
IBSS और अतिरिक्त लूप लाइन परियोजना
हल्दीपोकुर-बहालदा रोड के बीच ₹4.6 करोड़ की लागत से इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम (IBSS) मार्च 2027 तक लगाया जाएगा।
इसके अलावा राजखरसावां में लाइन संख्या 182 पर CSR विस्तार और मालगाड़ियों की स्टेबलिंग के लिए अतिरिक्त लूप लाइन ₹23.69 करोड़ की लागत से दिसंबर 2027 तक बनाई जाएगी।
रेलवे बोर्ड को भेजे गए बड़े प्रस्ताव
रेलवे ने आदित्यपुर से गम्हरिया के बीच अतिरिक्त लाइन निर्माण के लिए ₹80 करोड़ का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है।
वहीं टाटानगर में वंदे भारत ट्रेन के रखरखाव और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ₹383 करोड़ का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को सौंपा गया है।
इसके अलावा टाटा यार्ड रिमॉडलिंग के लिए ₹482 करोड़ तथा चक्रधरपुर यार्ड रिमॉडलिंग के लिए ₹376 करोड़ की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। झारसुगुड़ा यार्ड परियोजना पर भी काम प्रस्तावित है, जिसके तहत अतिरिक्त लाइनें और प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन सभी योजनाओं के लागू होने के बाद टाटानगर, चक्रधरपुर और आसपास के रेल नेटवर्क में परिचालन क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी और यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।

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