"नहीं संभल रहा तो कुर्सी छोड़ दीजिए" : पेपर लीक पर सिसोदिया का शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला
देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को लेकर राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में सिसोदिया ने कहा कि अगर देश की परीक्षा व्यवस्था नहीं संभल रही है और बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं तो शिक्षा मंत्री को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा। सिसोदिया ने कहा कि देश के युवा दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा का पेपर पहले ही लीक हो जाता है तो उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में गड़बड़ियों और अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं, जिससे छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है।
सिसोदिया ने कहा कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय यह बताना चाहिए कि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी विभाग में लगातार विफलताएं सामने आती हैं तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी मंत्री की भी बनती है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं और पेपर लीक मामलों की जांच एजेंसियां गंभीरता से जांच कर रही हैं। सरकार का दावा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, क्योंकि लाखों छात्रों का करियर इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है। यही कारण है कि पेपर लीक का मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
आने वाले समय में सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और छात्रों का भरोसा किस तरह वापस जीतती है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। फिलहाल इतना तय है कि पेपर लीक और परीक्षा घोटालों का मुद्दा देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिस पर जवाबदेही और सुधार की मांग लगातार तेज होती जा रही है।