जो व्यक्ति गौमाता के प्रति अपमानजनक विचार रखता है, वह सनातन संस्कृति की भावनाओं को कभी समझ नहीं सकता। समाज को ऐसी नकारात्मक और विभाजनकारी सोच का लोकता
“जो व्यक्ति गौमाता के प्रति अपमानजनक विचार रखता है, वह सनातन संस्कृति की भावनाओं को कभी समझ नहीं सकता। समाज को ऐसी नकारात्मक और विभाजनकारी सोच का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना चाहिए
सनातन धर्म में गौमाता आस्था और सम्मान का प्रतीक हैं। किसी भी प्रकार की अपमानजनक टिप्पणी अस्वीकार्य है।
जनता को सोच-समझकर ऐसे लोगों का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध करना चाहिए
अविमुक्तेश्वरानंद जी से पुछा जाय वह इसके राजनीतिक शुभचिंतक बने हुए है