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एक-एक बूंद के लिए तरसे लोग: गोविंदपुरी में पानी संकट गहराया, जनता बेहाल

समाचार रिपोर्ट:
दक्षिणी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में पिछले एक सप्ताह से पानी की भारी किल्लत ने लोगों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई परिवारों को पीने के पानी तक के लिए बाजार से महंगी बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं।
इलाके की गलियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि घरों के नल सूखे पड़े हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। कहीं लोग बाल्टियां लेकर पानी की तलाश में भटक रहे हैं, तो कहीं परिवार एक-एक बूंद पानी बचाकर दिन गुजारने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। लोगों का कहना है कि सरकार और विभागों के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आते हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
जब इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के JE रमेश यादव से शिकायत की गई, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा,
“वजीराबाद का प्लांट ही बंद है, मेरे हाथ में कुछ नहीं है। मैं यहां सिर्फ ऑपरेटर बनकर बैठा हूं, मुझे जितनी पानी की सप्लाई मिल रही है, मैं उतनी दे रहा हूं।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक जिम्मेदार अधिकारी की ओर से आम जनता के साथ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोगों की पीड़ा के प्रति संवेदनहीन रवैया दर्शाता है।
वहीं, लोगों ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मंचों और भाषणों में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब आम जनता मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही होती है, तब जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह नाकाम दिखाई देती है।
गोविंदपुरी के निवासियों ने दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित प्रशासन से तुरंत पानी की सप्लाई बहाल करने, टैंकर व्यवस्था बढ़ाने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि लोगों को इस कठिनाई से राहत मिल सके।

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