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पंचायत व निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराने का हाईकोर्ट फैसला




ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में पिछले एक साल से जिस बड़े चुनावी संकट ने हर राजनीतिक दल और जमीन की राजनीति को रोक रखा था, उस पर मंगलवार की शाम होते ही पर्दा गिरने वाला है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट समय पर पंचायत और शहर स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराए जाने के खिलाफ दायर की गई अवमानना याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत कानूनी समीक्षा करने के बाद याचिकाकर्ताओं की अवमानना याचिकाओं को निरस्त करते हुए खारिज कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इसके साथ यह भी साफ कर दिया कि राज्य सरकार अब राजस्थान में आगामी 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी करे, यह अंतिम फैसला होगा।

इस फैसले के बाद जहां एक तरफ सरकार को अवमानना की कार्रवाई से बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ 31 जुलाई की नई डेडलाइन ने प्रशासनिक अमले को पूरी तरह से इलेक्शन मोड में ला खड़ा किया है।


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सरकार पर ‘अवमानना’ का खतरा?

पिछले साल नवंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की 439 नगरीय निकायों पर एक साथ सुनवाई करते हुए जनप्रतिनिधि सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को एक कड़ा निर्देश जारी किया था। उस आदेश के तहत सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक वार्डों का गठन करना था और सीमांकन का कार्य पूरा करना था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 से पहले चुनाव संपन्न कराने थे। लेकिन 15 अप्रैल 2026 की समय सीमा तक भी और हालात पर चुनाव नहीं हो सके, तो विपक्ष और याचिकाकर्ताओं ने इसे न्यायपालिका के आदेश की अवहेलना माना। इसी को आधार बनाकर कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह खींची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सरकार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की गुहार लगाई थी, जिस पर पिछले महीने हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।


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खंडपीठ का फैसला, बदल गया कानूनी समीकरण

जब इस बेहद संवेदनशील मामले पर जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ में सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत का माहौल पूरी तरह कानूनी तर्कों से गरमा गया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने के लिए खुद राजस्थान के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद कोर्ट रूम में मौजूद थे। महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने राज्य सरकार का मजबूत पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि सरकार की मंशा चुनाव टालने की नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक मजबूरियां और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट में देरी होने के कारण चुनाव कराना संभव नहीं हो पा रहा था। इसके साथ ही सरकार की ओर से एक विशेष प्रार्थना पत्र भी पेश किया गया था, जिसमें चुनावी डेडलाइन को आगे बढ़ाने की मांग की गई थी।

खंडपीठ ने सरकार की दलीलों और बदले हुए हालात का परीक्षण करने के बाद चुनाव नहीं कराए जाने के खिलाफ दायर की गई अवमानना याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत कानूनी समीक्षा के बाद याचिकाकर्ताओं की अवमानना याचिकाओं को निरस्त करते हुए खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने इसके साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार अब राजस्थान में आगामी 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी करे।

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