बीजेपी राज में 2014-2026 तक पेपर लीक कांडों का विस्तृत इतिहास, सबसे ज्यादा पेपर लीक पिछले 10 सालों में
भारत में 2014 से 2026 तक भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन गया है। इस दौरान 65 से अधिक बड़े मामले सामने आए जिनमें करोड़ों छात्र प्रभावित हुए। 2015 में AIPMT (अब NEET) पेपर लीक का खुलासा हुआ, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द कर पुनः आयोजित करने का आदेश दिया। 2017 में SSC CGL परीक्षा में धांधली के आरोप लगे और दिल्ली में हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया। 2018 में CBSE बोर्ड के 10वीं और 12वीं के पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं REET और UPTET में 2021 में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, जिसके कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। 2023 में तेलंगाना में TSPSC पेपर लीक का मामला उठा। 2024 में उत्तर प्रदेश पुलिस कोंस्टेबल परीक्षा और RO/ARO परीक्षा में भी पेपर लीक के कारण परीक्षाएं रद्द हुईं। इसी वर्ष UGC-NET परीक्षा भी रद्द कर दी गई। NEET की शुरुआत 2013 में हुई, लेकिन 2015 से लेकर 2026 तक इसके कई पेपर लीक विवाद सामने आए जिनमें सॉल्वर गैंग, ग्रेस मार्क्स घोटाले और रिजल्ट में अनियमितता शामिल हैं। बिहार और गुजरात में गिरफ्तारियां हुईं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 2026 में भी NEET पेपर लीक के आरोप लगें और CBI जांच शुरू हुई।
पूरे देश में 2019-2024 के बीच 1.4 करोड़ से अधिक अभ्यर्थी इन घोटालों से प्रभावित हुए और 15 से अधिक राज्यों में मामले दर्ज हुए। पेपर लीक अब एक संगठित नेटवर्क बन चुका है जो युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। इस समस्या से गरीब और मेहनती छात्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जबकि जिम्मेदार लोग अक्सर बच निकलते हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।