सौहार्द का 'गया मॉडल':
सतर्क प्रशासन, सक्रिय नागरिक और त्योहारों में बिखरेगी भाईचारे की मिठास,
विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार
गया जा भारत त्योहारों का देश है, जहां पर्व केवल तिथियों का फेरबदल नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना और आपसी भाईचारे का उत्सव होते हैं।
आगामी ईद-उल-जोहा (बकरीद) को लेकर गया जिला प्रशासन की तत्परता यह दर्शाती है कि जब नेतृत्व दूरदर्शी हो, तो व्यवस्थाएं कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतरती हैं।
समाहरणालय सभाकक्ष में जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर एवं वरीय पुलिस अधीक्षक श्री सुशील कुमार की अध्यक्षता में हुई जिला शांति समिति की बैठक महज एक रस्मी प्रशासनिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह आगामी त्योहार को सुरक्षित, स्वच्छ और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने का एक अचूक 'ब्लूप्रिंट' है।
अफवाहों पर 'डिजिटल स्ट्राइक' और कानून का इकबाल,
आज के दौर में किसी भी त्योहार के शांतिपूर्ण आयोजन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'डिजिटल उपद्रवी' होते हैं, जो बंद कमरों में बैठकर सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में जहर घोलने का प्रयास करते हैं।
इस संदर्भ में जिला प्रशासन का रुख बेहद स्पष्ट और सराहनीय है।
साइबर सेल और साइबर सेनानियों को 'हाई अलर्ट' पर रखना तथा आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ सीधे नामजद प्राथमिकी (FIR) का निर्देश यह साफ करता है कि उपद्रवियों के लिए व्यवस्था में कोई ढील नहीं है।
एसएसपी सुशील कुमार की यह चेतावनी कि "विधि व्यवस्था बिगाड़ने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा" और लगातार 'रोको-टोको' अभियान चलाने का निर्देश, अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करने के लिए जरूरी है।
संवेदनशीलता और नागरिक सुविधाओं का अनूठा 'माइक्रोप्लान',
अक्सर त्योहारों के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी जन-आक्रोश का कारण बनती है, लेकिन इस बार गया नगर निगम की तैयारी एक मिसाल पेश करती है।
भीषण गर्मी को भांपते हुए त्योहार के दिन सुबह 4:00 बजे से ही जलापूर्ति शुरू करने का फैसला और गांधी मैदान में स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू बकरीद के दौरान स्वच्छता और वेस्ट मैनेजमेंट का है।
नगर आयुक्त द्वारा 22 चिन्हित वार्डों के लिए तैयार किया गया 'माइक्रोप्लान'—जिसके तहत बंद नुमा कवर्ड गाड़ियों से अपशिष्ट का उठाव कर नैली डंपिंग यार्ड में गहरे गड्ढों में डिस्पोज किया जाएगा—यह सुनिश्चित करता है कि धार्मिक भावनाएं भी आहत न हों और शहर की स्वच्छता व पर्यावरण भी अक्षुण्ण रहे।
शांति समिति:
केवल मंच नहीं, अब 'फील्ड' की जिम्मेदारी,
इस बैठक का सबसे व्यावहारिक पक्ष शांति समिति के सदस्यों को उनकी वास्तविक भूमिका की याद दिलाना रहा।
डीएम शशांक शुभंकर ने स्पष्ट किया कि समिति के सदस्यों की जिम्मेदारी केवल बंद कमरों की बैठकों तक सीमित नहीं है; उन्हें 'फील्ड' में उतरना होगा।
जब समाज के प्रबुद्ध नागरिक खुद जमीन पर उतरकर लोगों को आपसी भाईचारे के लिए प्रेरित करेंगे, तो किसी भी असामाजिक तत्व के मंसूबे कामयाब नहीं हो सकते।
अनुमंडल और प्रखंड स्तर तक की जा रही गहन समीक्षा इस बात की गारंटी है कि प्रशासन का नियंत्रण जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर गांवों तक मजबूत है।
निष्कर्ष:
गया हमेशा से ही ज्ञान, मोक्ष और कौमी एकता की भूमि रहा है।
जिला प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता और डिजिटल निगरानी की त्रिवेणी से जो अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार किया है, वह सराहनीय है।
अब जिम्मेदारी गया के आम अवाम की है। नागरिक प्रशासन के इन प्रयासों में सहयोग करें, अफवाहों को दरकिनार करें और इस बकरीद पर पूरी दुनिया को गया की गंगा-जमुनी तहजीब का एक बार फिर दीदार कराएं। याद रखें, त्योहार बांटने का नहीं, दिलों को जोड़ने का नाम है।