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भीषण गर्मी में पानी के लिए तरसे गांव: हैंडपंप सूखे, सोलर टंकियां कबाड़, वाटर कूलर भी दे रहे धोखा रखरखाव के अभाव में बंद पड़ीं सरकारी योजनाएं, ग्राम प

भीषण गर्मी में पानी के लिए तरसे गांव: हैंडपंप सूखे, सोलर टंकियां कबाड़, वाटर कूलर भी दे रहे धोखा
रखरखाव के अभाव में बंद पड़ीं सरकारी योजनाएं, ग्राम प्रधान और व्यापार मंडल की लापरवाही उजागर

लखनऊ देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है। भूजल स्तर नीचे जाने से ग्राम पंचायतों के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं। हालात यह हैं कि सरकार की करोड़ों की योजनाएं भी रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रही हैं।

सोलर पंप-टंकी योजना भी फेल
पिछले कुछ सालों में जल जीवन मिशन के तहत कई ग्राम पंचायतों में हैंडपंपों पर सोलर पंप और पानी की टंकियां लगवाई गई थीं। सोलर पंप और पानी की टंकियां जगह जगह से उखाड़ भी दी गई है, दावा था कि इससे सालभर पानी मिलेगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर जगहों पर ये सोलर पंप बिना देखरेख के बंद पड़े हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में तो सोलर पैनल और टंकियों को ही खोलकर हटा दिया गया है। लाखों रुपये की लागत से बनी ये टंकियां अब कबाड़ बन चुकी हैं। कहीं मोटर खराब है तो कहीं पाइपलाइन टूटी पड़ी है। मरम्मत कराने वाला कोई नहीं है।

NGO के वाटर कूलर भी बने शोपीस
गर्मी में राहगीरों और ग्रामीणों को राहत देने के लिए सामाजिक संस्थाओं ने जगह-जगह वाटर कूलर लगवाए थे। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों और स्थानीय व्यापार मंडल को सौंपी गई थी। लेकिन हकीकत में ज्यादातर वाटर कूलर बंद पड़े हैं।

जो कूलर चालू भी हैं, वे पानी ठंडा नहीं कर रहे। कहीं बिजली कनेक्शन नहीं है तो कहीं फिल्टर खराब पड़े हैं। साफ-सफाई न होने से इनमें से बदबू आ रही है, जिससे लोग पानी पीने से कतरा रहे हैं।

होटल-रेस्टोरेंट में भी नहीं मिल रहा मुफ्त पानी
शहरों में भी हालात खराब हैं। ठेले, होटल और रेस्टोरेंट में खाने के बाद सामान्य पानी देने के बजाय ग्राहकों को 20-30 रुपये की बोतल थमा दी जाती है। कई जगह बिल में पानी के अलग से पैसे जोड़ दिए जाते हैं, जिससे गर्मी में आम आदमी की परेशानी और बढ़ गई है।

"पानी के लिए भटक रहे हैं"
बलिया के रसड़ा क्षेत्र के ग्रामीण रामअवध ने बताया, "गांव में 3 हैंडपंप थे, सब सूख गए। 2 साल पहले सोलर टंकी लगी थी, 6 महीने में ही खराब हो गई। अब 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है।"

आजमगढ़ के एक व्यापारी ने कहा, "बाजार में NGO ने कूलर लगवाया था। व्यापार मंडल को दिया था। अब न वो ठंडा करता है न कोई पूछने वाला है।"

प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायतों को हर साल हैंडपंप मरम्मत और पेयजल व्यवस्था के लिए बजट मिलता है।
इसके बावजूद न हैंडपंपों की रिबोरिंग हो रही है न सोलर टंकियों की मरम्मत। वाटर कूलर की जिम्मेदारी लेने वाले प्रधान और व्यापार मंडल भी आंख मूंदे बैठे हैं।

जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि खराब हैंडपंपों और सोलर पंपों की सूची तैयार कराई जा रही है। जल्द मरम्मत कार्य शुरू होगा। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारियों को वाटर कूलर चालू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

भीषण गर्मी में जब तापमान 45 डिग्री पार कर रहा है, ऐसे में पेयजल योजनाओं का ठप पड़ना ग्रामीणों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।

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_रिपोर्ट: यदि आपके गांव में भी पेयजल योजना बंद पड़ी है तो ब्लॉक या जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।_

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