लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जयंती पर जनकल्याण का संदेश
इस वर्ष 25-26 मई के आस-पास लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की जयंती मनाई जाती है। अहिल्याबाई होलकर सामंतवादी युग में एक दुर्लभ राजकीय व्यक्तित्व थीं, जिन्होंने जनहित और लोककल्याण को शासन की मुख्य प्राथमिकता बनाया। उनके शासन में प्रजा की आवाज़ को निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना गया और वे न्याय तथा निष्पक्षता के आधार पर फैसले लेती थीं। उनका प्रसिद्ध पत्र पेशवा को सैन्य दबाव और अन्यायपूर्ण मांगों के विरुद्ध आज भी नैतिक शासन का प्रतीक है।
अहिल्याबाई के युग में आधुनिक लोकतंत्र नहीं था, फिर भी उन्होंने प्राचीन गण-राज्य जैसी लोक उन्मुख व्यवस्था का पालन किया। उनके शासन में जनहित, न्यायपूर्ण निर्णय और प्रजा की भावनाओं का सम्मान प्रमुख था। यह जयंती आज के शासकों और नीति-निर्माताओं के लिए नैतिक दिशा-निर्देश है कि शासन तभी सफल होता है जब वह जनता के हित और न्याय पर आधारित हो। संस्थापक दीपक कुमार पाल ने इस अवसर पर अहिल्याबाई को सम्मानपूर्वक याद करते हुए उनके जीवन आदर्श की महत्ता पर बल दिया है।