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सुल्तानपुर तहसील सदर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, आउटसाइडरों और निजी मुंशियों के सहारे चल रही व्यवस्था पर उठे सवाल

सुल्तानपुर
तहसील सदर की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला प्रशासन द्वारा पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश जारी किए जाने के बावजूद तहसील में भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
आरोप है कि कई लेखपाल अपने निजी मुंशियों और आउटसाइडर कर्मचारियों के जरिए तहसील परिसर में बैठकर पूरा कामकाज संचालित करवा रहे हैं। बिना मौके पर जांच किए ही आख्या तैयार कर दी जाती है और सुविधा शुल्क लेने के बाद पक्ष विशेष के समर्थन में रिपोर्ट लगाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिन फरियादियों से धन या अन्य लाभ नहीं मिल पाता, उनकी फाइलों को महीनों तक लंबित रखा जाता है। आम जनता को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे लोग मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं।
माल बाबू कार्यालय को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी बताई जा रही है। आरोप है कि बिना पैसे कोई काम नहीं होता और फरियादियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। वहीं विनियमित क्षेत्र कार्यालय पर भी सुविधा शुल्क और सिफारिश के बिना काम न होने के आरोप लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद आखिर आउटसाइडर तत्व तहसील में कैसे सक्रिय हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो तहसील प्रशासन से जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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