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CBSE की प्रणाली पर गंभीर विवाद गहराया, छात्रों ने उत्तर पुस्तिका गड़बड़ी और धुंधली स्कैन कॉपी पर उठाए सवाल :-


छात्रों ने गलत मूल्यांकन, पोर्टल त्रुटि और पारदर्शिता की कमी का लगाया आरोप; निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग तेज. 𝐂𝐁𝐒𝐄 की 𝐎𝐧-𝐒𝐜𝐫𝐞𝐞𝐧 𝐌𝐚𝐫𝐤𝐢𝐧𝐠 (𝐎𝐒𝐌) प्रणाली को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की सत्यापन प्रक्रिया में कथित तकनीकी गड़बड़ियों और मूल्यांकन संबंधी विसंगतियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में छात्र अपनी शिकायतें साझा कर रहे हैं और प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें जो स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई गई है, वह उनकी वास्तविक उत्तर पुस्तिका से मेल नहीं खाती। कुछ छात्रों का दावा है कि उनकी मूल हस्तलिपि और अपलोड की गई कॉपी की लिखावट में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। इससे छात्रों के बीच गलत मूल्यांकन और संभावित डेटा गड़बड़ी को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

इसके अलावा, बड़ी संख्या में छात्रों ने यह शिकायत भी की है कि उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जो प्रतियां मिलीं, वे अत्यधिक धुंधली, अस्पष्ट और पढ़ने योग्य नहीं थीं। कई पन्नों में शब्द साफ दिखाई नहीं देने, उत्तर कटे होने और स्कैन क्वालिटी बेहद खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित करना लगभग असंभव हो जाता है कि परीक्षक ने सही मूल्यांकन किया या नहीं।

मामले को लेकर एक और बड़ा विवाद उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी प्राप्त करने के लिए लिए जाने वाले शुल्क को लेकर भी सामने आया है। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि पहले बोर्ड ने उत्तर पुस्तिका पुनः प्राप्त करने और सत्यापन प्रक्रिया के लिए अधिक शुल्क निर्धारित किया था, जिसे बाद में संशोधित करना पड़ा। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूरी प्रक्रिया पर्याप्त तैयारी और तकनीकी दक्षता के बिना लागू की गई थी।

कई छात्रों ने पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याओं की भी शिकायत की है। कुछ छात्रों का कहना है कि भुगतान सफल होने के बावजूद आवेदन दर्ज नहीं हुआ, जबकि कई को उत्तर पुस्तिका डाउनलोड करने में कठिनाई हुई। कई मामलों में सर्वर स्लो होने और दस्तावेज समय पर उपलब्ध न होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी त्रुटियां हैं, तो यह छात्रों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उनका कहना है कि ऐसी प्रणाली में उच्च स्तर की पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।

छात्रों और अभिभावकों ने 𝐂𝐁𝐒𝐄 से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, विवादित मामलों की पुनः समीक्षा हो, और जिन छात्रों को नुकसान हुआ है उन्हें उचित राहत प्रदान की जाए। कई छात्र संगठनों ने भी बोर्ड से तकनीकी खामियों को स्वीकार कर सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

हालांकि, 𝐂𝐁𝐒𝐄 ने छात्रों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित फर्जी सर्कुलर एवं भ्रामक दावों से सावधान रहने की अपील की है। बोर्ड की ओर से अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, लेकिन बढ़ते विवाद के बीच यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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