बढ़ती महंगाई पर कवि ओ.पी. सिहाग की मार्मिक कविता ने बयां किया गरीबों का दर्द
महंगाई की लगातार बढ़ती मार के बीच कवि ओ.पी. सिहाग द्वारा लिखी गई कविता “ऐ महंगाई” लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। कविता में गरीब, मजदूर, किसान, कर्मचारी और आम आदमी की परेशानियों को बेहद भावुक शब्दों में व्यक्त किया गया है।
कवि ने अपनी रचना में आटा, दाल, सब्जी, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। साथ ही मकान निर्माण सामग्री, कपड़े, शिक्षा और सफर के बढ़ते खर्च का भी उल्लेख किया गया है।
कविता की पंक्तियां “कमर तोड़ दी गरीब की, ऐ महंगाई तू क्यों आई” और “निवाला छीन लिया है गरीब का” आम जनता की पीड़ा को सीधे तौर पर दर्शाती हैं।
कवि ओ.पी. सिहाग ने कहा कि आज महंगाई का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ रहा है। गरीब परिवारों के लिए घर चलाना कठिन होता जा रहा है, वहीं शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतें भी लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।
इस कविता के माध्यम से कवि ने सरकार और समाज का ध्यान आम जनता की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। कविता सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा की जा रही है और लोग इसे वर्तमान समय की सच्चाई बता रहे हैं।